ओडिशा सरकार की ईंधन संरक्षण योजना, 8 निर्देश जारी

ओडिशा सरकार की ईंधन संरक्षण योजना, 8 निर्देश जारी

भुवनेश्वर, 21 मई। पश्चिम एशिया में बने संकट और ईंधन के बढ़ते उपयोग पर चिंता के चलते, ओडिशा सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने हेतु एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों के लिए 8 सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री ने पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ईंधन संरक्षण पर चर्चा की थी। इसके बाद उन्होंने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या कम की और जनता से भी ईंधन बचाने की अपील की थी।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सरकारी कार्यों में पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने के लिए ठोस उपाय किए जाएं।

सरकार ने 8 मुख्य निर्देश प्रस्तुत किए हैं, जिसमें वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देना, सरकारी कार्यालयों में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग अनिवार्य करना, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कारपूलिंग को लागू करना, वाहन उपयोग के लिए नई गाइडलाइन रखना, आधिकारिक यात्रा में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना, निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की योजना बनाना, सरकारी कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा उपलब्ध कराना और ईंधन खपत में 10 प्रतिशत की कमी का लक्ष्य शामिल है।

निर्देशों के अनुसार, सरकारी बैठकें, समीक्षा बैठकें, ट्रेनिंग प्रोग्राम और वर्कशॉप अब ज्यादातर वर्चुअल स्वरूप में आयोजित की जाएंगी। केवल आवश्यक अधिकारियों को ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने की अनुमति होगी। 1 जून से सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चारपहिया वाहन इलेक्ट्रिक होंगे, जबकि खास परिस्थितियों में ही पेट्रोल या डीजल वाहनों की खरीद की अनुमति रहेगी।

जो वरिष्ठ अधिकारी सरकारी वाहन का उपयोग करते हैं, उन्हें कारपूलिंग की सलाह दी गई है। ऐसे वाहनों का ईंधन आवंटन भी आधा किया जाएगा। वित्त विभाग को 15 दिनों के अंदर यह तय करने के लिए कहा गया है कि किन श्रेणियों के अधिकारियों को निजी उपयोग के लिए सरकारी वाहन मिलेंगे। लंबी दूरी की यात्रा के लिए सरकारी काम से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को बस और ट्रेन के उपयोग की सलाह दी गई है।

सरकारी कार्यों में अधिकारियों द्वारा निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के संबंध में भी वित्त विभाग को दिशा-निर्देश बनाने के लिए कहा गया है। जहां सरकारी कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां इलेक्ट्रिक बस या मिनी बस सेवा शुरू की जाएगी ताकि उनकी दैनिक यात्रा सुगम हो सके। सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे आधिकारिक वाहनों में पेट्रोल और डीजल की खपत हर महीने कम से कम 10 प्रतिशत तक घटाएं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों को राज्य सचिवालय, सरकारी विभागों, उपखंड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों, ब्लॉक कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में कड़ाई से लागू किया जाएगा।