ओडिशा कैबिनेट ने मत्स्य, कानून और ऊर्जा क्षेत्रों में मुख्य सुधारों को दिया हरी झंडी

ओडिशा कैबिनेट ने मत्स्य, कानून और ऊर्जा क्षेत्रों में मुख्य सुधारों को दिया हरी झंडी

भुवनेश्वर, 20 मई। ओडिशा की कैबिनेट ने बुधवार को कानून, ऊर्जा और मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास समेत कुल सात विभागों के 10 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रमुख प्रस्तावों में ओडिशा मरीन फिशिंग (प्रतिबंध एवं विनियमन) विधेयक, 2026 (ओएमएफआरए-2026) शामिल हैं। इसके तहत 1982 के ओडिशा मरीन फिशिंग रेगुलेशन एक्ट को समाप्त कर समुद्री मत्स्य के लिए एक नया और समावेशी कानूनी ढांचा विकसित किया जाएगा।

मुख्य सचिव अनु गर्ग ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि समुद्री मत्स्य पालन ओडिशा के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट में डीप सी फिशिंग और झींगा निर्यात मिशन की घोषणा की थी, इसीलिए नए कानून की आवश्यकता महसूस हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून में समुद्री संसाधनों के संरक्षण, तटीय सुरक्षा, समुद्री शैवाल विकास और मैरीकल्चर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो पहले शामिल नहीं थे। सरकार को विश्वास है कि इससे राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य 2036 तक समुद्री खाद्य निर्यात को 25,000 करोड़ रुपये तक पहुँचाना है, जो “विकसित ओडिशा विजन 2036-47” और राज्य की ब्लू इकोनॉमी योजना के अनुरूप होगा।

इसके अलावा, कैबिनेट ने कानून विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूर किया, जिसके अंतर्गत 1974 से 2025 के बीच बने 358 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा।

सरकारी स्रोतों के अनुसार, इनमें से अधिकांश कानून संशोधन अधिनियम थे, जिनके प्रावधान पहले से ही मूल कानूनों में समाहित हो चुके हैं। जबकि कुछ कानून विशेष परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे, जिनकी अब कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है।

ओडिशा राज्य विधि आयोग की सिफारिशों के अनुसार, राज्य सरकार ओडिशा रिपीलिंग बिल-2026 लाएगी, जिससे ये 358 कानून रद्द होंगे।

कैबिनेट ने ओडिशा थर्मल पावर पॉलिसी-2008 में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी) द्वारा राज्य को दिए जाने वाले बिजली हिस्से को 12-14 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाएगा। यह निर्णय केंद्र सरकार के सुझावों और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की नीतियों के अनुरूप लिया गया है।

बुधवार की बैठक में कैबिनेट ने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी।