नोएडा: एसएससी परीक्षा में घोटाला करने वाले गिरोह का खुलासा, 7 आरोपी सहित मुख्य सरगना गिरफ्तार

नोएडा: एसएससी परीक्षा में घोटाला करने वाले गिरोह का खुलासा, 7 आरोपी सहित मुख्य सरगना गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा संपन्न ऑनलाइन परीक्षा में व्यापक धांधली करने वाले गिरोह का खुलासा उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने किया है।

एसटीएफ की नोएडा टीम ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह सीएपीएफ और एसएसएफ में कांस्टेबल (जीडी) तथा असम राइफल्स में राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में प्रॉक्सी सर्वर और स्क्रीन शेयरिंग तकनीक का उपयोग करके नकल करा रहा था। गिरफ्तारियां ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क इलाके के बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र से की गईं।

एसटीएफ ने बताया कि आरोपियों के पास से 50 लाख रुपये नकद, 10 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, एक राउटर, अभ्यर्थियों की सूची, दो प्रवेश पत्र और इडुक्विटी कंपनी के चार पहचान पत्र बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में प्रदीप चौहान (मुजफ्फरनगर), अरुण कुमार (मथुरा), संदीप भाटी (बुलंदशहर), निशांत राघव (बुलंदशहर), अमित राणा (बागपत), शाकिर मलिक (बागपत) और विवेक कुमार (बुलंदशहर) शामिल हैं। शाकिर और विवेक को परीक्षा के अभ्यर्थी बताया जा रहा है। एसटीएफ को लंबे समय से इस प्रकार के घोटालों की सूचनाएं मिल रही थीं।

अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में, पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में एक टीम बनाकर जांच की जा रही थी। जांच के दौरान यह पता चला कि बालाजी डिजिटल जोन में एसएससी ऑनलाइन परीक्षा के दौरान प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग करके बाहर बैठे सॉल्वर से प्रश्नपत्र हल कराया जा रहा था। इस जानकारी के आधार पर एसटीएफ ने परीक्षा केंद्र पर छापा मारकर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में प्रमुख आरोपी प्रदीप चौहान ने बताया कि उसने मेरठ कॉलेज से एमकॉम की डिग्री प्राप्त की है और वह लंबे समय से ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली कर रहा था। उसने कहा कि परीक्षा केंद्र पर इडुक्विटी कंपनी द्वारा परीक्षा संचालित की जा रही थी, और सर्वर को बायपास करके स्क्रीन शेयरिंग के माध्यम से बाहरी सॉल्वर से प्रश्नपत्र हल कराया गया। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि अमित राणा ने परीक्षा केंद्र के सर्वर को बायपास करने की तकनीक विकसित की थी, जबकि अरुण कुमार प्रॉक्सी सर्वर का संचालन करता था।

संदीप भाटी उन अभ्यर्थियों की पहचान करता था जो पैसे देकर परीक्षा पास करना चाहते थे। गिरोह प्रति अभ्यर्थी चार लाख रुपये वसूलता था, जिसमें से 50 हजार रुपये उस व्यक्ति को दिए जाते थे जो अभ्यर्थियों को लाता था, बाकी राशि गिरोह के सदस्यों और सॉल्वर के बीच बांटी जाती थी। इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अध्यादेश-2023 और आईटी एक्ट की धाराएं शामिल हैं। स्थानीय पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है।