नई दिल्ली, 22 मई। विश्व योग दिवस के अवसर पर, भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योगासन के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने पर जोर देते हुए नए-नए योगासनों के लाभों की जानकारी दे रहा है। मंत्रालय ने अवसाद से छुटकारा पाने के लिए प्रभावी योगासनों की जानकारी साझा की है।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, तनाव में कमी और भावनाओं को संतुलित करने में भी बहुत फायदेमंद है। आजकल की तेज-तर्रार जिंदगी, कार्य का तनाव और व्यक्तिगत समस्याएं अवसाद को एक सामान्य समस्या बना चुकी हैं। ऐसे में नियमित रूप से योगाभ्यास करना आवश्यक हो गया है।
आयुष मंत्रालय का उद्देश्य है “योग युक्त, रोग मुक्त”। मंत्रालय नागरिकों से आग्रह करता है कि वे प्रतिदिन सुबह इन आसनों का अभ्यास करें। शुरुआत 15-20 मिनट से कर सकते हैं और धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं। योग केवल डिप्रेशन से लड़ने में भी मदद करता है, बल्कि स्वास्थ्य को भी सुधारता है।
मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स को कम करता है, मानसिक स्थिति को स्थिर बनाए रखता है और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं से राहत दिला सकता है। डिप्रेशन के खिलाफ कारगर योगासन में ध्यान, भ्रामरी प्राणायाम, ताड़ासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम शामिल हैं।
ध्यान: प्रतिदिन 10-15 मिनट का ध्यान करने से मन की उलझनें कम होती हैं और आंतरिक शांति का अनुभव होता है।
पवनमुक्तासन: यह आसन न केवल पेट की समस्याओं को दूर करता है बल्कि मानसिक अशांति को भी खत्म करता है। यह शरीर से नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालता है।
भ्रामरी प्राणायाम: इस प्राणायाम का अभ्यास करने से मस्तिष्क को शांति मिलती है। भौंरे की तरह आवाज निकालते समय सांस लेने से तनाव और चिंता कम होती है।
ताड़ासन: खड़े होकर किया जाने वाला यह आसन शरीर और मन को ऊर्जावान बनाता है। यह मुद्रा और आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी सहायक है।
भुजंगासन: सांप की मुद्रा वाला यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और छाती की जकड़न को कम करने में मदद करता है। इससे डिप्रेशन से जुड़ी नकारात्मक भावनाएं घटती हैं।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम: नासिका के एक छिद्र से सांस लेने और दूसरे से छोड़ने वाला यह प्राणायाम मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और मन को शांत रखता है।