मुंबई, 24 मई। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने अपने बयान से एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। बकरीद और पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि जैसे हिंदू त्योहारों पर पर्यावरण संरक्षण की बातें की जाती हैं, वैसे ही बकरीद पर भी लोगों को 'वर्चुअल तरीके' से त्योहार मनाने को प्रोत्साहित करना चाहिए।
एक कार्यक्रम के दौरान राणे ने कहा कि जब होली और दीपावली जैसे हिंदू उत्सव आते हैं, तब कुछ लोग आगे बढ़कर पर्यावरण की रक्षा की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि होली के लिए 'ड्राई होली' और दीपावली में पटाखे न जलाने की सलाह दी जाती है, लेकिन बकरीद के समय ये लोग चुप रहते हैं।
वीर सावरकर का जिक्र करते हुए राणे ने कहा कि सावरकर ने यह उल्लेख किया था कि हिंदुओं को मुसलमानों से नहीं, बल्कि अपने ही कुछ लोगों से खतरा है।
आगे बोलते हुए राणे ने कहा कि बकरीद के अवसर पर पर्यावरण प्रेमियों को यह सलाह देनी चाहिए कि लोग 'वर्चुअल बकरीद' मनाएं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "कंप्यूटर पर बकरी की फोटो लगाकर दिखाइए कि हम बकरी काट रहे हैं। आखिर जानवरों को परेशान करने की आवश्यकता क्यों है?"
उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या पर्यावरण के मुद्दे पर सलाह देने वाले लोग बकरीद पर इसी तरह की अपील करने का साहस दिखाएंगे। राणे ने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे यह जानने को मिलेगा कि उसका क्या परिणाम होता है।
नितेश राणे महाराष्ट्र सरकार में मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री हैं तथा कणकवली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उनके इस बयान के बाद राजनीति के क्षेत्र में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।