नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में अंतरिक्ष यात्रियों ने मिर्च का पौधा उगाया, तस्वीरें साझा कीं

नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में अंतरिक्ष यात्रियों ने मिर्च का पौधा उगाया, तस्वीरें साझा कीं

नई दिल्ली, 21 मई। नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ने दो महत्वपूर्ण छवियां साझा की हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि "बागवानी केवल पृथ्वी पर ही नहीं होती।" ये तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर हो रहे पौधों के परीक्षण को दर्शाती हैं। नासा चंद्रमा और मंगल पर लंबे मिशनों की तैयारी के लिए अंतरिक्ष में बागवानी को बढ़ावा दे रहा है।

नासा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें एस्ट्रोनॉट थॉमस मार्शबर्न एक्सपेडिशन-66 के दौरान आईएसएस के एडवांस्ड प्लांट हैबिटेट में उगाई जा रही मिर्च को देख रहे हैं। ये एपीएच-04 प्रयोग का एक भाग हैं। दूसरी छवि कोलंबस मॉड्यूल में एडवांस्ड प्लांट हैबिटेट के अंदर लाल-गुलाबी रोशनी में उगी मिर्च की है।

नासा ने आईएसएस पर "वेजी" नामक एक छोटा स्पेस गार्डन विकसित किया है, जिसमें बागवानी के लिए कार्य किया जाता है। यह एक कैरी-ऑन बैग के आकार का सेटअप है, जिसमें एक साथ छह पौधे उगाए जा सकते हैं। माइक्रोग्रैविटी में पौधों की खेती करना बहुत कठिन है क्योंकि पानी बुलबुले बनाता है, इसलिए विशेष "प्लांट पिलो" (मिट्टी आधारित तकिए) का उपयोग किया जाता है। इन तकियों में पोषक तत्वों, पानी और हवा का संतुलन सही रहता है। ऊपर स्थित एलईडी लाइट्स पौधों को लाल और नीली रोशनी प्रदान करती हैं, जिससे पूरा चैंबर गुलाबी-लाल दिखाई देता है।

अब तक वेजी में लेट्यूस की तीन किस्में, चाइनीज कैबेज, मिजुना सरसों, लाल रशियन केल और जिनिया के फूल सफलतापूर्वक उगाए जा चुके हैं। कुछ सब्जियों को अंतरिक्ष यात्री खा चुके हैं, जबकि कुछ नमूने अध्ययन के लिए धरती पर भेजे गए हैं।

नासा का मानना है कि पौधे केवल भोजन के लिए नहीं हैं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों की मानसिक भलाई के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ताजगी भरा भोजन, विटामिन और हरियाली उन्हें पृथ्वी से जोड़ कर रखती है और तनाव को कम करती है। लंबे मिशनों के दौरान, ये पौधे रेडिएशन से भी सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

वेजी के लिए नासा एडवांस्ड प्लांट हैबिटेट नामक उन्नत प्रणाली के साथ कार्य कर रहा है। इसमें 180 से अधिक सेंसर लगे हैं, जो पृथ्वी पर स्थित टीम को निरंतर जानकारी मुहैया कराते रहते हैं। इसमें बौनी गेहूं और मिर्च जैसी फसलों का परीक्षण किया जा चुका है। भविष्य में टमाटर, बेरी और अन्य फसलों को उगाने की योजना है।