देहरादून, 22 मई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी और चारधाम यात्रा के दौरान यातायात या कानून-व्यवस्था में किसी भी प्रकार की बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि सभी धर्मों का आदर होना चाहिए, लेकिन कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता द्वारा सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए धामी ने कहा कि धार्मिक गतिविधियाँ केवल मस्जिद और ईदगाह जैसे निर्धारित स्थानों पर ही की जानी चाहिए, ताकि लोगों को कोई असुविधा न हो।
धामी ने कहा, "मैंने सुना है कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता का कहना है कि सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत दी जानी चाहिए। हमने स्पष्ट कर दिया है कि नमाज पढ़ने के लिए विशिष्ट स्थान हैं और वह वहीं होनी चाहिए। यह व्यवस्था है, और किसी को भी इसे बिगाड़ने का अधिकार नहीं है।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि चारधाम यात्रा चल रही है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड आए हैं। यात्रा के समय सड़क यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, "चारधाम यात्रा के दौरान लोग विभिन्न रास्तों से देवभूमि आ रहे हैं। ऐसे समय में सड़कों को धार्मिक प्रदर्शन या रुकावट का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा। हमारी योजना है कि राज्य में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।"
सीएम धामी ने कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहले से ही प्रशासन के लिए चुनौती है और सार्वजनिक परिवहन में कोई भी रुकावट सहन नहीं की जाएगी। कोई भी व्यक्ति या समूह खुद को कानून से ऊँचा नहीं समझ सकता।
उन्होंने कहा, "सभी को आस्था का सम्मान करना चाहिए, लेकिन कोई भी कानून और व्यवस्था से ऊपर नहीं है। अगर किसी को नमाज पढ़नी है, तो उसे मस्जिद, ईदगाह या अन्य निर्धारित स्थानों पर ही पढ़नी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर बाधा नहीं होनी चाहिए, और किसी को भी किसी के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए।"
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता हर मुद्दे को केवल वोट बैंक की राजनीति के दृष्टिकोण से देखते हैं, जो उचित नहीं है। ऐसे मामलों में तुष्टीकरण और राजनीतिक सोच से ऊपर उठना चाहिए। जो लोग वर्षों से देवभूमि में तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं, वे ऐसा करते रहें, लेकिन हम ऐसे विचारों के साथ नहीं चलेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार उत्तराखंड की 'शांति, संस्कृति और अनुशासन' को किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होने देगी। उन्होंने देवभूमि को धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व की भूमि बताया।