राजगीर, 24 मई। बिहार के राजगीर में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में रविवार को शंघाई सहयोग संगठन के महासचिव नुरलान यरमेकबायेव ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ आगमन किया, जहाँ उनका औपचारिक स्वागत किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि उनके नालंदा विश्वविद्यालय दौरे का आयोजन भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय के निमंत्रण पर हुआ, जो विश्वविद्यालय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण घटना रहा। इस दौरान विश्वविद्यालय में सतत विकास, नेट जीरो उद्देश्य, साझेदारी, बौद्ध विरासत और क्षेत्रीय सहयोग पर कई प्रस्तुतियाँ और संवाद सत्र आयोजित किए गए।
संकाय के सदस्यों और अधिकारियों के साथ बातचीत में ज्ञान का आदान-प्रदान, सांस्कृतिक समझ, विरासत की सुरक्षा, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया। एससीओ महासचिव नुरलान यरमेकबायेव ने अपने भाषण में एससीओ देशों की साझा बौद्ध विरासत के विषय में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने उल्लेख किया कि 2023 में भारत की अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि में साझा बौद्ध विरासत को शंघाई सहयोग संगठन के नए आधार के रूप में समाविष्ट किया गया। नुरलान यरमेकबायेव ने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय साझा बौद्ध विरासत के संवर्धन और प्रसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि बौद्ध विरासत मध्य एशिया, रूस, मंगोलिया और चीन जैसे देशों के साथ सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है, जहाँ आज भी बौद्ध समुदाय समृद्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्राचीन बौद्ध नेटवर्क, सांस्कृतिक गलियारे, भाषाएँ, लिपियाँ और पांडुलिपियाँ इन क्षेत्रों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाते हैं। आगे उन्होंने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय इन पहलुओं को अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में सक्रियता से शामिल कर रहा है, जिसमें विभिन्न देशों के संस्थानों के साथ साझेदारी और बौद्ध धर्म से संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं।