मुंबई, 21 मई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की मुंबई शाखा ने सिंथेटिक ड्रग तस्करी से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई की है। ठाणे में स्थित विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने गिरोह के नेता समेत पांच संदिग्धों को 15 साल से लेकर एक साल तक की सजा सुनाई है।
विशेष एनडीपीएस अदालत ने मोहम्मद आरिफ याकूब भुजवाला, जो मुंबई के चिंचबंदर का निवासी है, को 15 साल की कठोर जेल और दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी।
इसके अलावा, परवेज खान उर्फ 'चिंकू पठान', मोहम्मद सलमान खान और ठाणे के भिवंडी के विक्रांत जैन को पांच-पांच साल की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
बांद्रा पश्चिम के निवासी हारिस फैजुल्लाह खान को एक साल की सजा के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी भुकतान करना पड़ा।
एनसीबी के अनुसार, जांच के दौरान परवेज खान उर्फ चिंकू पठान की 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की दो चल और तीन अचल संपत्तियों को फ्रीज किया गया है।
गिरोह के नेता मोहम्मद आरिफ भुजवाला के खिलाफ वित्तीय जांच में नकद राशि, आठ चल संपत्तियां और चार अचल संपत्तियां जब्त की गई, जिनकी कुल कीमत पांच करोड़ रुपये से अधिक है, और ये संपत्तियां ड्रग्स की अवैध कमाई से प्राप्त की गई थीं।
यह मामला 20 जनवरी 2021 को तब शुरू हुआ जब एनसीबी के अधिकारियों ने खुफिया जानकारी पर नवी मुंबई के घनसोली क्षेत्र में छापेमारी की। इस कार्रवाई में ड्रग तस्कर परवेज नसरुल्लाह खान को गिरफ्तार किया गया।
तलाशी के दौरान उसके पास से 52.2 ग्राम मेफेड्रोन (एमडी ड्रग) बरामद किया गया।
एनसीबी ने बताया कि छापे में एक अवैध पिस्तौल, पांच जिंदा कारतूस, 12,500 रुपये नगद और 3.57 लाख रुपये मूल्य के आभूषण भी मिले, जिन्हें ड्रग व्यापार की आय से खरीदा गया माना गया।
जांच में खुलासा हुआ कि मोहम्मद आरिफ भुजवाला ड्रग्स की सप्लाई कर रहा था, जिसका नेटवर्क मुंबई के चिंचबंदर क्षेत्र से संचालित होता था।
खुलासों और तकनीकी सबूतों के आधार पर, एनसीबी ने आरिफ भुजवाला से जुड़े कई स्थानों पर छापेमारी की।
एनसीबी के जांचकर्ताओं का कहना है कि विक्रांत जैन उर्फ विक्की जैन न केवल ड्रग तस्करी के नेटवर्क को आर्थिक सहायता देता था, बल्कि वह खुद भी इस अवैध कार्य में शामिल था।
भिवंडी स्थित जैन के ठिकाने पर छापेमारी में 52.8 ग्राम मेफेड्रोन भी बरामद किया गया, जिसमें पान मसाला और तंबाकू उत्पाद में मिलाया गया नशीला पदार्थ शामिल था।
जांच एजेंसी ने कहा कि जब्त वित्तीय दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड से यह सिद्ध हुआ कि विक्रांत जैन मादक पदार्थों के व्यापार को वित्तिय सहायता और प्रबंधन में मदद कर रहा था।