नई दिल्ली, 20 मई। भारतीय फुटबॉल के विभिन्न प्रमुख क्लबों के प्रीमियर 1 लाइसेंस के आवेदन को ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) द्वारा अस्वीकार कर दिया गया है। इनमें मोहन बागान सुपर जायंट, केरल ब्लास्टर्स एफसी और ओडिशा एफसी जैसे प्रसिद्ध क्लब शामिल हैं।
17 मई को एआईएफएफ की क्लब लाइसेंसिंग समिति की बैठक में यह जानकारी दी गई कि स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली, ओडिशा एफसी, मोहन बागान सुपर जायंट, चेन्नईयिन एफसी, केरल ब्लास्टर्स एफसी, मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब और इंटर काशी के लाइसेंस अस्वीकार कर दिए गए हैं। शासी निकाय ने बताया कि यह क्लब अपने फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं, या नियमों के अनुसार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए छूट का अनुरोध कर सकते हैं।
एआईएफएफ के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जिन क्लबों के लाइसेंस खारिज किए गए, वे या तो इस निर्णय के खिलाफ अपील कर सकते हैं या राष्ट्रीय क्लब प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
वहीं, नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी, ईस्ट बंगाल एफसी, जमशेदपुर एफसी, मुंबई सिटी एफसी, बेंगलुरु एफसी, एफसी गोवा और पंजाब एफसी को कुछ शर्तों के साथ लाइसेंस प्रदान किए गए हैं। हालांकि, इन क्लबों ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को पूरा किया है, लेकिन ये शर्तें दर्शाती हैं कि कुछ मानदंडों को अभी भी पूरा किया जाना बाकी है।
भारतीय क्लब लाइसेंसिंग प्रणाली एक वार्षिक आवश्यकता है, जिसका उद्देश्य देश के क्लबों में व्यावसायिकता, बुनियादी ढांचे, प्रशासन और खेल मानकों को सुधारना है। यह लाइसेंसिंग ढांचा एआईएफएफ और एशियाई फुटबॉल परिसंघ द्वारा अनुमोदित घरेलू और एशियाई प्रतियोगिताओं में भागीदारी की पात्रता को निर्धारित करता है।
इस प्रणाली में लाइसेंस को दो श्रेणियों में बांटा गया है— 'प्रीमियर 1' भारतीय सुपर लीग क्लबों के लिए और 'प्रीमियर 2' भारतीय फुटबॉल लीग के क्लबों के लिए। इस प्रक्रिया में क्लबों का मूल्यांकन कई मानकों जैसे वित्तीय स्थिति, कानूनी मुद्दे, बुनियादी ढांचे, स्टाफ और युवा विकास के आधार पर किया जाता है।