‘मेड इन इंडिया’ से प्रदूषण के खिलाफ कदम, सीएम रेखा गुप्ता ने तीन आधुनिक एयर प्यूरीफायर्स का निरीक्षण

‘मेड इन इंडिया’ से प्रदूषण के खिलाफ कदम, सीएम रेखा गुप्ता ने तीन आधुनिक एयर प्यूरीफायर्स का निरीक्षण

नई दिल्ली, 23 मई। शनिवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में लगाए गए तीन अत्याधुनिक 'मेड इन इंडिया' एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम का दौरा किया। इन तकनीकों का उद्देश्य शहरी वायु प्रदूषण, धूल, धुएं, पीएम 2.5, पीएम 10 और अन्य हानिकारक तत्वों को नियंत्रित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ चलाए जा रहे प्रयास केवल कुछ महीनों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह 365 दिनों तक स्वच्छ हवा और स्वास्थ्य सुधार के लिए प्रतिबद्धता है। दिल्ली सरकार पारंपरिक उपायों के साथ नई तकनीकें, वैज्ञानिक अनुसंधान, और नवाचार आधारित समाधानों पर जोर दे रही है, ताकि राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'मेक इन इंडिया' और नवाचार को एक नई पहचान मिली है। देश में विकसित तकनीकें अब पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समाधान दे रही हैं। दिल्ली सरकार उन सभी तकनीकों पर ध्यान दे रही है, जो प्रदूषण नियंत्रण में मदद कर सकती हैं और जिन्हें राजधानी में व्यापक रूप से लागू किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने पहले सत गुरु राम सिंह मार्ग (रामा रोड) पर स्थापित एसटीआर 101 फिल्टर-रहित एयर प्यूरीफायर सिस्टम का निरीक्षण किया। इस सड़क पर कुल 21 इकाइयां बिजली के खंभों पर लगाई गई हैं। यह आधुनिक सिस्टम हवा में धुएं, धूल, पीएम 1, पीएम 2.5, पीएम 10 और कार्बन जैसे प्रदूषकों की मात्रा को कम करने के लिए सक्षम है। इसकी उच्च-आवृत्ति चिप तकनीक हवा में बैक्टीरिया और वायरस को भी निष्क्रिय करती है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।

उन्होंने जानकारी दी कि यह प्रणाली हर घंटे लगभग तीन लाख लीटर हवा को शुद्ध करने में सक्षम है। यह सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों के स्तर को कम करने में भी सहायक है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से फिल्टर-रहित है, स्वचालित रूप से साफ होती है, और इसका रखरखाव बहुत कम है, जिसका मतलब है कि किसी उपभोज्य सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा, इसमें आईओटी आधारित लाइव मॉनिटरिंग और डेटा ट्रैकिंग की सुविधा है, जिससे इसकी कार्यप्रणाली पर नजर रखी जा सकती है।

सीएम रेखा गुप्ता ने कीर्ति नगर से मायापुरी मार्ग पर मुख्य भूमि पर स्थित भारत की पहली ईवी-आधारित एंटी स्मॉग गन का भी निरीक्षण किया। यह प्रणाली पूरी तरह से जीरो-एमिशन और मोबाइल है, जिसे विभिन्न स्थानों पर ले जाकर चालाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि यह तकनीक उच्च दबाव वाले पंप और उच्च गति वाले पंखों का उपयोग करके सूक्ष्म जल कणों का छिड़काव करती है, जिससे कृत्रिम वर्षा की तरह प्रभाव उत्पन्न होता है। ये जल कण हवा में उपस्थित धूल और अन्य प्रदूषकों को नीचे गिराते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर घटता है। यह तकनीक 'क्लीन एयर कॉरिडोर' बनाने में भी योगदान करती है, जिससे दृश्यता में सुधार होता है और लोगों को अधिक आराम से सांस लेने में मदद मिलती है। इसमें रियल-टाइम पीएम सेंसर और आईओटी आधारित नियंत्रण प्रणाली भी है, जो हवा की गुणवत्ता के अनुसार अपने आप संचालित होती है, जिससे जल और ऊर्जा की बचत होती है।

मुख्यमंत्री ने कीर्ति नगर फायर स्टेशन के पास स्थापित पवन III रोडसाइड एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस का भी निरीक्षण किया। यह तकनीक वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को उसके स्रोत के निकट ही नियंत्रित करने के लिए बनाई गई है। यह सड़क किनारे डिवाइडर पर लगी प्रणाली प्रदूषित हवा को एक शक्तिशाली सक्शन सिस्टम से खींचती है और फिर इसे एक मल्टी-लेयर क्लींजिंग प्रक्रिया से गुजारकर साफ हवा को पुनः वातावरण में छोड़ती है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में किए गए फील्ड ट्रायल के दौरान इस तकनीक के चलते हवा में पार्टिकुलेट प्रदूषण (पीएम) के स्तर में करीब 29 प्रतिशत की कमी देखी गई थी। यह प्रणाली प्रदूषण को वातावरण में फैलने से पहले नियंत्रित करने में सक्षम है, जिसे कम रखरखाव की आवश्यकता और बड़े पैमाने पर उपयोग के कारण प्रभावी टेक्नोलॉजी माना जा रहा है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वायु प्रदूषण केवल कुछ महीनों की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे वर्ष की निरंतर चुनौतियों का सामना करता है। इसी सोच के साथ सरकार सालभर प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। हाल ही में पर्यावरण विभाग द्वारा आयोजित इनोवेशन चैलेंज में देशभर के नवोन्मेषकों और स्टार्टअप्स ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण सुधार से संबंधित कई अभिनव समाधान प्रस्तुत किए थे। इन नवाचारों का मूल्यांकन आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के सहयोग से किया गया और उनमें से सर्वश्रेष्ठ परियोजनाओं को दिल्ली में लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

उन्होंने उल्लेख किया कि आज जिन अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों का दौरा किया गया, वे सभी उसी पहल के तहत चयनित नवाचारों का हिस्सा हैं। सरकार ने इन्हें पायलट परियोजनाओं के रूप में विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया है, ताकि उनकी प्रभावशीलता को परखा जा सके और सफल होने पर इनका व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा सके। भविष्य में भी सरकार नए और प्रभावी समाधानों को अपनाती रहेगी, ताकि प्रदूषण की चुनौती से सही तरीके से निपटा जा सके। दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण के साथ सक्रिय है। धूल नियंत्रण, वाहनों से उत्सर्जन और अन्य उपायों पर यह ध्यान केंद्रित कर रही है।