नई दिल्ली, 24 मई। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की चार दिन की भारत यात्रा का रविवार को दूसरा दिन है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने भारतीयों पर की गई नस्लीय टिप्पणियों को बेवकूफी करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक ऐसा देश है जो सभी का स्वागत करता है। जब भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों के बारे में पूछा गया, तो रुबियो ने कहा, 'मैं इस विषय पर क्या कहना चाहिए, इसे समझ नहीं पा रहा हूं, लेकिन मैं ऐसी टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से लेता हूं।' उन्होंने आगे कहा कि हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, और अमेरिका में भी ऐसे लोग हैं जो निरंतर मूर्खतापूर्ण बातें करते हैं, किंतु अमेरिका का परिचय स्वागत करने वाले देश के रूप में है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने यहां आकर खुद को अमेरिकी समाज में ढाला है और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रुबियो ने अमेरिका में भारतीय समुदाय द्वारा किए गए योगदान की सराहना की और बताया कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि यह निवेश आगे बढ़ता रहे। भारतीय पेशेवरों की दक्षता ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में substantial योगदान दिया है।
वीजा और इमिग्रेशन नीति में बदलावों के बारे में रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की नई नीतियां केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व पर लागू की जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में 2 करोड़ से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं, जिसके चलते इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की जरूरत महसूस की गई है।
जे1, एफ1 और एच1बी वीजा के नियमों में हालिया परिवर्तनों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने इमिग्रेशन सिस्टम को 21वीं सदी के अनुरूप अपडेट कर रहा है। इस प्रक्रिया में कुछ समय तक समस्याएं और चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन अंततः नया सिस्टम पहले से अधिक प्रभावी और बेहतर होगा।
रुबियो ने बताया, 'हर साल लगभग 10 लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और देश के विकास में योगदान करते हैं। इमिग्रेशन ने अमेरिका को समृद्ध बनाया है, किंतु समय के साथ सिस्टम में सुधार करना अनिवार्य है।' उन्होंने कहा कि नए बदलावों का प्रभाव भारत जैसे देशों पर अधिक दिखाई दे सकता है, क्योंकि भारत से उच्च कौशल वाले पेशेवरों की एक बड़ी संख्या अमेरिका आती है, लेकिन उन्होंने दोहराया कि यह नीति किसी विशेष देश को लक्षित करके नहीं बनाई गई है।
रुबियो ने उल्लेख किया कि अमेरिका वर्तमान में अपने इमिग्रेशन सिस्टम में बड़े सुधारों की प्रक्रिया से गुजर रहा है। उन्होंने माना कि इस बदलाव के दौरान कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, किंतु प्रक्रिया पूरी होने के बाद नया सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी और सक्षम होगा।
उन्होंने कहा, 'अमेरिका इस समय उस तंत्र में सुधार कर रहा है जिसके माध्यम से यह तय होता है कि कितने लोग देश में आएंगे, कौन आएगा और कब आएगा। किसी भी तंत्र में सुधार या बदलाव के समय एक संक्रमण काल आता है, जिसमें कुछ कठिनाइयाँ संभव हैं। हम अपने इमिग्रेशन सिस्टम को 21वीं सदी के मानकों के अनुसार नवीनतम बना रहे हैं ताकि यह केवल अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि यहां आने वाले लोगों के लिए भी बेहतर साबित हो।'
रुबियो ने आगे कहा कि जब यह प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, तब अमेरिका के पास पहले से अधिक कुशल और टिकाऊ इमिग्रेशन सिस्टम होगा। उन्होंने बताया, 'मेरा मानना है कि नया सिस्टम भारत से अमेरिका आने वाले कार्यकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए लाभदायक साबित होगा, किंतु इस बदलाव के दौरान कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये बदलाव भारत को निशाना बनाकर नहीं किए जा रहे हैं। ये पूरी दुनिया में लागू हो रहे हैं। भारत जैसे देशों पर इसका अधिक प्रभाव हो सकता है, क्योंकि वहां से बड़ी संख्या में उच्च कौशल वाले पेशेवर अमेरिका आते हैं, लेकिन अंततः हमारा लक्ष्य एक बेहतर, अधिक प्रभावकारी और स्थायी प्रणाली बनाना है।'