कक्षा 1 से 8 तक मैथिली को मातृभाषा का दर्जा, सम्राट चौधरी ने बताया गर्व का विषय

कक्षा 1 से 8 तक मैथिली को मातृभाषा का दर्जा, सम्राट चौधरी ने बताया गर्व का विषय

पटना, 25 मई। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा पहली से आठवीं कक्षा में मैथिली भाषा को मातृभाषा के रूप में मान्यता दिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने केंद्र सरकार के इस निर्णय को गर्व का विषय बताया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "यह निर्णय मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं मातृभाषा मैथिली को शिक्षा क्षेत्र में उचित स्थान दिलाने के लिए ऐतिहासिक और बेहद प्रशंसनीय है।" उन्होंने यह भी कहा कि सीबीएसई के पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली को मातृभाषा के रूप में मान्यता मिलना, मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गर्व का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को लगातार नई शक्ति मिल रही है। उन्होंने आगे बताया कि यह निर्णय केवल मैथिली को नई पहचान और सम्मान ही नहीं देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का एक प्रभावी साधन भी बनेगा।

गौरतलब है कि सीबीएसई ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में माध्यमिक स्तर पर मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर को एक पत्र में दी। 19 मई 2026 को भेजे गए पत्र में मंत्री ने बताया कि सांसद डॉ. ठाकुर द्वारा 8 फरवरी 2026 को भेजे गए अनुरोध के बाद, इस विषय की जांच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा की गई थी। जांच में पाया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नीति के अनुसार, कक्षा 5 तक और यदि संभव हो, तो कक्षा 8 तक मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जानी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है। एनसीईआरटी ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं के लिए प्राइमर विकसित कर लिए हैं।