मुंबई, 22 मई। मानसून से पहले आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने व्यापक तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को सभी विभागों को आपदा जोखिम को कम करने और राहत कार्यों को सुचारू ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने पूरे राज्य में आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए एआई आधारित समेकित कमांड और कंट्रोल प्रणाली बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
डॉक्टर फडणवीस ने प्री-मानसून तैयारी और आपदा प्रबंधन पर हुए समीक्षा बैठक में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हर साल मानसून नई चुनौतियों के साथ आता है, इसलिए पिछले अनुभवों से सीखकर अपनी तैयारियों को मजबूत करना बेहद आवश्यक है।
सीएम ने सभी विभागों से कहा कि वे अगले 15 दिनों के भीतर अपनी तैयारियों की स्थिति की समीक्षा करें और जहां भी प्रक्रियागत कमियां हों, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाए। उन्होंने मानक संचालन प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित करने, समय पर चेतावनियां जारी करने, त्वरित राहत प्रदान करने, और प्रभावित व्यक्तियों की सहायता में देरी न होने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय, पुलिस, नगर निगमों और विभिन्न कंट्रोल रूमों को एकीकृत रिस्पॉन्स प्रणाली से जोड़ने के लिए भी निर्देश दिए, ताकि मानसून के दौरान बेहतर समन्वय हो सके और नागरिकों को तत्काल राहत पहुँचाई जा सके।
आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि बांधों से पानी छोड़े जाने के दौरान कई बार निचले क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है। इस परिस्थिति को देखते हुए समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने कमजोर पुलों का संरचनात्मक ऑडिट कराने और यदि असुरक्षित पाए जाएं तो वहां यातायात रोकने के लिए निर्देश दिए।
राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार ने फसल क्षति, मकानों को हुए नुकसान, पशुधन की हानि और जनहानि के लिए विशेष राहत पैकेज स्वीकृत किया है।
इस पैकेज के अंतर्गत खरीफ फसल के नुकसान पर प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये, बाढ़ में ज़मीन खोने पर 47 हजार रुपये मुआवजा, और रोजगार गारंटी योजना के तहत 5 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 1.06 लाख किसानों के खातों में सीधे लाभ हस्तांतरित करते हुए 16,224 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं।
पहली बार क्षतिग्रस्त कुओं के लिए प्रति कुआं 30 हजार रुपये मुआवजा मंजूर किया गया है। लगभग 11 हजार कुओं को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, राहत पात्रता की सीमा को 2 हेक्टेयर से बढ़ाकर 3 हेक्टेयर कर दिया गया है।
बैठक में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, रेलवे, दूरसंचार विभाग, बीएमसी और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण सहित कई एजेंसियों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।