दिल्ली-एनसीआर में ऑटो, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट वाहनों और ऐप-आधारित कैब ऑपरेटरों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों, पुराने किराया ढांचे और आर्थिक समस्याओं के कारण 21, 22 और 23 तारीख को तीन दिनों की हड़ताल रखने का निर्णय लिया है। इस हड़ताल के दौरान ड्राइवरों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने वाहन सड़कों पर न निकालें।
चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने बताया कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती हुई कीमतों ने ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति को बहुत प्रभावित किया है। दिल्ली सरकार ने लगभग 15 साल पहले दिल्ली-एनसीआर के लिए एक टैक्सी नीति बनाई थी, जिसमें करीब 70 हजार गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। उसी समय टैक्सी का किराया 12.50 रुपए प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया था, लेकिन इतने वर्षों बाद भी इसे संशोधित नहीं किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि किराया बढ़ाने के लिए यूनियन ने कई बार सरकार से संवाद किया है और यह मामला हाईकोर्ट तक गया था। अदालत ने किराया बढ़ाने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद ट्रांसपोर्ट विभाग ने बातचीत में जल्दी किराया बढ़ाने का आश्वासन दिया था। यूनियन का दावा है कि अवमानना याचिका दायर करने के बाद अदालत ने फिर से किराया बढ़ाने के लिए निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग के डिप्टी कमिश्नर ने यूनियन को चर्चा में बताया था कि किराया 20 से 25 रुपए प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है जो उपराज्यपाल को भेजा गया है। मंजूरी मिलने पर नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके साथ ही, ओला-उबर जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं के किराए को नियंत्रित करने का आश्वासन भी दिया गया है। यूनियन का कहना है कि मौजूदा महंगाई के कारण ड्राइवरों और ग्राहकों दोनों की स्थिति चिंता में है, जिसके चलते हड़ताल का निर्णय लिया गया।
राठौर ने ड्राइवरों से यह अनुरोध किया कि वे किसी बाहरी प्रभाव में न आएं और तीन दिनों की हड़ताल में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ संगठन सरकार के दबाव में हैं और ड्राइवरों की समस्याओं को ध्यान में नहीं ले रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार बातचीत के लिए उन्हें आमंत्रित करती है और उनकी मांगों के प्रति सकारात्मक संकेत देती है, तो भविष्य के निर्णय पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, सरकार की तरफ से बातचीत के लिए कोई आधिकारिक पहल नहीं हुई है।