मध्य प्रदेश: अनियमितताओं के कारण गेहूं खरीदी में किसानों की परेशानी

मध्य प्रदेश: अनियमितताओं के कारण गेहूं खरीदी में किसानों की परेशानी

भोपाल, 20 मई। मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीदारी का काम जारी है। राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को 28 मई तक जारी रखने का निर्णय लिया है। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस खरीद प्रक्रिया में अव्यवस्था का आरोप लगाया है, जिससे किसानों को दिक्कतें आ रही हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकारी गेहूं खरीद के तंत्र को किसानों के लिए समस्याओं और भ्रष्टाचार का स्रोत बताते हुए कहा है कि खेतों में गेहूं होने के बावजूद सैटेलाइट सर्वे और एआई सत्यापन में गलत रिकॉर्ड दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे किसानों का पंजीकरण या तो निरस्त हो रहा है या लम्बित है।

पटवारी ने कहा कि खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था का माहौल है। किसान कई घंटों और कभी-कभी दिनों तक ट्रॉलियों में गेहूं लेकर खड़े रहने को मजबूर हो जाते हैं। तौल मशीनों की कमी, सुस्त प्रक्रिया और भीड़ ने उनकी समस्याओं को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, बारदानों की कमी के कारण खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों पर खुद बोरे लाने का दबाव डाला जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। कई किसानों के लिए भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं है। बैंकिंग और पोर्टल से जुड़ी समस्याओं के कारण किसान आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, नमी और गुणवत्ता के आधार पर मनमाने ढंग से कटौती और गेहूं को रिजेक्ट करने की शिकायतें लगातार आ रही हैं।

पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि खरीद केंद्रों पर बिचौलियों और भ्रष्टाचार का शासन है। छोटे किसान मजबूरी में व्यापारियों को कम कीमत पर गेहूं बेचने पर मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि 'पहले तौल' के नाम पर लेनदेन और राजनीतिक दबाव जैसी समस्याएं भी कई खरीद केंद्रों से सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों को राहत देने में बुरी तरह असफल रही है। अगर सरकार ने तुरंत सुधार नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर संघर्ष करेगी।