मध्य प्रदेश: 15 जून तक सुझाव के लिए यूसीसी वेबसाइट का शुभारंभ

मध्य प्रदेश: 15 जून तक सुझाव के लिए यूसीसी वेबसाइट का शुभारंभ

भोपाल, 22 मई। मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया ने एक नया मोड़ लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को यूसीसी एमपी की आधिकारिक वेबसाइट का उद्घाटन किया।

इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य कानून को अंतिम रूप देने से पहले जनता के विचारों और सुझावों का संकलन करना है, ताकि सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

वेबसाइट का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को अपने विचार और सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचाने का अवसर उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पारदर्शी और सहयोगात्मक प्रक्रिया के माध्यम से राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक संतुलित और व्यापक रूप से स्वीकार्य यूनिफॉर्म सिविल कोड का निर्माण किया जा सकेगा।

सरकार ने सुझावों के लिए अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की है, ताकि नागरिकों को अपने सुझाव प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

यूनिफॉर्म सिविल कोड का लक्ष्य धार्मिक आधार पर भिन्न-भिन्न व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानून लागू करना है, जो विवाह, तलाक, संपत्ति, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो।

मध्य प्रदेश इस दिशा में उत्तराखंड और गुजरात की राह पर चल रहा है, जहां यूसीसी लागू करने की दिशा में पहले से ही ठोस प्रयास किए जा चुके हैं।

यह कदम भारतीय जनता पार्टी की उस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के अनुसार है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत देशभर में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात की गई है।

यूसीसी पर बनी उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुईं।

इस समिति का गठन अप्रैल 2026 के अंत में किया गया था और इसे यूसीसी का विस्तृत मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। वेबसाइट के उद्घाटन के समय विशेषज्ञ समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। न्यायमूर्ति देसाई इस प्रकार की प्रक्रियाओं का नेतृत्व अन्य राज्यों में भी कर चुकी हैं।

मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल के माध्यम से प्राप्त सभी सुझावों की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी और विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया में उन्हें ध्यान में रखा जाएगा।

इस जन परामर्श प्रक्रिया को इस संवेदनशील और लंबे समय से विवादित मुद्दे पर सहमति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।