क्या होगा अगर स्पेस मिशन के लॉन्च में समस्या आए? जानिए 'अबॉर्ट सिस्टम' की भूमिका

क्या होगा अगर स्पेस मिशन के लॉन्च में समस्या आए? जानिए 'अबॉर्ट सिस्टम' की भूमिका

नई दिल्ली, 20 मई। अंतरिक्ष मिशन अक्सर बेहद खतरनाक होते हैं। यदि लॉन्च के दौरान कोई तकनीकी खामी आती है, तो इससे एस्ट्रोनॉट्स को गंभीर खतरा हो सकता है। इस जोखिम को कम करने के लिए स्पेस एजेंसियां एस्ट्रोनॉट्स के लिए विशेष सुरक्षा उपायों का प्रावधान करती हैं, जिसे 'अबॉर्ट सिस्टम' कहा जाता है। कनाडाई एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने एक पुराने वीडियो में इस प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब रॉकेट लॉन्च के लिए तैयार होता है, तब यह पूरी तरह ईंधन से भरा रहता है। एस्ट्रोनॉट्स लिफ्ट के माध्यम से ऊपर जाते हैं, अपनी सीट बेल्ट बांधते हैं और उड़ान की तैयारी करते हैं। लेकिन यदि रॉकेट में लॉन्च से पहले कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो उनके पास दो प्रमुख विकल्प होते हैं।

एस्ट्रोनॉट्स को लॉन्च पैड से लेकर समुद्र में उतरने तक की सभी संभावित इमरजेंसी स्थितियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। अबॉर्ट सिस्टम आधुनिक स्पेसक्राफ्ट की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा तकनीकों में से एक है, जो यह सुनिश्चित करता है कि यदि लॉन्च के दौरान कोई अप्रत्याशित घटना होती है, तो अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से धरती पर लौट सकें।

पहला विकल्प काउंटडाउन के शुरुआती चरणों में लागू होता है। यदि समस्या लॉन्च से पहले होती है, तो एस्ट्रोनॉट्स इमरजेंसी एग्जिट (हैच) का उपयोग करके लॉन्च टावर से बाहर निकल सकते हैं। इसके लिए वे टोकरियों और स्लाइड वायर्स का सहारा लेते हैं। उतरने के बाद, वे बंद गाड़ियों में बैठकर तेजी से लॉन्च पैड से दूर चले जाते हैं।

दूसरा विकल्प 'अबॉर्ट सिस्टम' है, जो लॉन्च के कुछ मिनट पहले या शुरुआती चरण में कार्यान्वित होता है। यदि लॉन्च के करीब पहुंचते ही रॉकेट में आग लगने या किसी गंभीर समस्या की संभावना होती है, तो यह सिस्टम सक्रिय हो जाता है। यह ओरियन कैप्सूल को रॉकेट के ऊपरी हिस्से से अलग कर देता है। यह एक प्रकार का बड़ा इजेक्शन सीट का काम करता है। अलग होने के बाद, कैप्सूल पैराशूट की मदद से नजदीकी समुद्र में सुरक्षित रूप से उतरता है, जहां एस्ट्रोनॉट्स बाहर निकलकर बचाव दल की सहायता लेते हैं।