खान साब ने पुरानी धुनों की महत्ता पर व्यक्त की राय - उत्कृष्ट संगीत सभी पीढ़ियों से जुड़ता है

खान साब ने पुरानी धुनों की महत्ता पर व्यक्त की राय - उत्कृष्ट संगीत सभी पीढ़ियों से जुड़ता है

मुंबई, 24 मई। प्रसिद्ध गायक खान साब ने पुराने गानों की बढ़ती लोकप्रियता पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि क्लासिक गाने आज भी युवा वर्ग से गहराई से जुड़ते हैं क्योंकि इनमें एक शाश्वत आत्मा होती है।

खान साब का कहना है कि पुरानी धुनें युवाओं को इसलिए प्रभावित करती हैं क्योंकि वे सच्ची भावनाओं और अमर संगीत से भरी होती हैं। उनके अनुसार, बेहतरीन संगीत समय की सीमाओं को पार कर जाता है और हर पीढ़ी को आकर्षित करता है।

खान साब ने विशेष बातचीत में कहा, "पिछले समय के म्यूजिक में एक अमर आत्मा थी। मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के दौर ने ऐसे गाने दिए हैं जो कभी पुराने नहीं होते। ऐसा संगीत कभी खत्म नहीं हो सकता।”

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेंड समय के साथ बदलते रहते हैं। वर्तमान का म्यूजिक भी एक दिन पुराना हो जाएगा, लेकिन संगीत की वास्तविकता वही रहेगी। खान साब ने उदाहरण देते हुए कहा, "हमारी इंडस्ट्री में केवल प्रस्तुति बदलती है, सामग्री वही रहती है।”

खान साब ने सूफी म्यूजिक की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा, "हमारी इंडस्ट्री में एक चीज हमेशा जीवित रहेगी और वो है सूफी म्यूजिक। यह हमेशा प्रासंगिक रहेगा।”

जब गायक से 'आरी आरी' गीत के पुनर्निर्माण के बारे में पूछा गया, जो मूल रूप से 'बॉम्बे रॉकर्स' का एक लोकप्रिय गाना है, और क्या उन्हें दर्शकों की उम्मीदों का दबाव महसूस हुआ, तो खान साब ने कहा कि उन्हें इस परियोजना में प्रेशर नहीं, बल्कि सम्मान का अनुभव हुआ। उन्होंने यह भी बताया, "जब टीम ने मुझसे संपर्क किया तो मैंने गाने की रचना और भाव को गहराई से समझने पर ध्यान केंद्रित किया। मैं बॉम्बे रॉकर्स के प्रति बहुत सम्मान रखता हूं।”

खान साब ने कहा कि फिल्म से पहले वह इस गाने से ज्यादा वाकिफ नहीं थे। रिकॉर्डिंग के दौरान गायक शाश्वत ने उन्हें बताया कि उनका पंजाबी लोक संगीत इस रचना के लिए एकदम सही है। उन्होंने स्क्रैच वर्जन बनाने का सुझाव दिया।

खान साब ने कहा, "मैंने इसे जल्दी ही रिकॉर्ड किया। शाश्वत भाई ने लाइन-बाय-लाइन गाइड किया और कुछ ही मिनटों में सब कुछ बहुत स्वाभाविक हो गया।”