नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 मई। केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार के द्वारा विरोध प्रदर्शन और दंगों से जुड़े 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने के निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम कन्नड़ कार्यकर्ताओं की रक्षा के बहाने 'दंगाइयों' को संतुष्ट करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जोशी ने एक बयान में कहा कि राज्य सरकार तुष्टीकरण की राजनीति के चलते संविधान और कानून के शासन को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार सांप्रदायिक दंगाइयों को छोड़ने के लिए कन्नड़ कार्यकर्ताओं का बहाना बना रही है। तुष्टीकरण के नाम पर, यह संविधान और देश की कानूनी व्यवस्था की अनदेखी कर रही है।
जोशी ने स्पष्ट किया कि मामलों को वापस लेने का निर्णय कन्नड़ कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की चिंता से ज्यादा 'मुस्लिम दंगाइयों' के हितों से प्रभावित था। उन्होंने आलंद सांप्रदायिक दंगों में 100 से अधिक आरोपियों के मामलों को वापस लेने की निंदा की और इसे बेहद गंभीर बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने सांप्रदायिक अशांति फैलाने और पुलिसकर्मियों पर घातक हमले करने वाले आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेकर तुष्टीकरण की राजनीति की सभी सीमाएं लांघ दी हैं।
जोशी के अनुसार, हिंसा के दौरान एक उग्र मुस्लिम युवक समूह ने कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाए और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक और एक कांस्टेबल गंभीरता से घायल हुए।
उन्होंने बताया कि इन सबके बावजूद, सरकार कन्नड़ कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामलों को वापस लेने के बहाने सांप्रदायिक दंगाइयों को रिहा कर रही है, जो तुष्टीकरण की राजनीति की चरमसीमा है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कानून प्रवर्तन कर्मियों की सुरक्षा भी अब खतरे में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि सरकार दंगाइयों को मुक्त कर उनकी इज्जत कर रही है, जो वास्तव में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
जोशी ने आखिरी में कहा कि सरकार किसानों के आंदोलन और कन्नड़ कार्यकर्ताओं से संबंधित मामलों को सांप्रदायिक दंगा मामलों के साथ मिलाकर जनता को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है।