कर्नाटक सरकार ने एनसीईआरटी से पाठ्यक्रम में भूजल संरक्षण अध्याय शामिल करने की अपील की

कर्नाटक सरकार ने एनसीईआरटी से पाठ्यक्रम में भूजल संरक्षण अध्याय शामिल करने की अपील की

बेंगलुरु, 22 मई। जल संकट की गंभीरता और जलवायु परिवर्तन की समस्याओं को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने केंद्रीय प्रशासन और एनसीईआरटी से स्कूल पाठ्यक्रम में भूजल संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक अलग अध्याय बनाने का अनुरोध किया है।

कर्नाटक के लघु सिंचाई एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्री एन. एस. बोसराजु ने इस पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने एनईपी 2020 के तहत संशोधित पाठ्यक्रम में "भूजल" पर एक विशेष अध्याय शामिल करने के लिए केंद्र को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।

मंत्री ने कहा कि एनसीईआरटी की कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक 'कॉन्टेम्परेरी इंडिया-II' में जल संसाधनों का उल्लेख है, लेकिन उसका ध्यान मुख्य रूप से सतही जल पर है, जबकि भारत के लिए महत्वपूर्ण भूजल को कम महत्व दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर उपलब्ध मीठे पानी का लगभग 97 प्रतिशत भूजल है। भारत में घरेलू उपयोग के लगभग 50 प्रतिशत तथा कृषि की 25 प्रतिशत जरूरतें भूजल पर निर्भर करती हैं।

बोसेराजू ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन, सतही जल की कमी और बढ़ती जल खपत के कारण देश के भूजल भंडार पर गंभीर दबाव बढ़ता जा रहा है।

कर्नाटक सरकार ने केंद्र को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया है कि पिछले 20 वर्षों में अत्यधिक दोहन वाले भूजल क्षेत्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे भूजल की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है।

राज्य सरकार का मानना है कि जल संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्कूल स्तर पर ही भूजल संबंधी जागरूकता को शुरू किया जाना चाहिए।

कर्नाटक ने अमेरिका जैसे देशों के शिक्षा मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्कूलों में भूजल प्रणाली, एक्वीफर के व्यवहार और प्रदूषण जैसे विषयों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

राज्य ने एनसीईआरटी से अनुरोध किया है कि 2027-28 सत्र के लिए तैयार की जा रही राष्ट्रीय पाठ्यचर्या में ऐसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक विषय शामिल किए जाएं।

इन विषयों में वर्षा जल संचयन, एक्वीफर रिचार्ज तकनीक और आधुनिक निगरानी तरीकों का उपयोग शामिल किया गया है।

कर्नाटक सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि पाठ्यक्रम में जल शक्ति मंत्रालय और नीति आयोग द्वारा चलाए जा रहे जल संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जाए।

मंत्री बोसेराजू ने कहा, "जल संकट का समाधान केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से नहीं किया जा सकता। नई पीढ़ी को स्कूल में जल संरक्षण का महत्व समझना चाहिए। जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल की आवश्यकता बढ़ रही है, ऐसे में इसका पाठ्यक्रम में समावेश जरूरी है।"

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेगी।