रांची, 24 मई। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रमुख सदस्य बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा पर आदिवासी समुदाय को विभाजित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को भाजपा कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 24 मई को दिल्ली में होने वाले आदिवासी समागम का विरोध करके इन दोनों पार्टियों ने अपने आदिवासी विरोधी स्वभाव को सिद्ध कर दिया है।
मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई भेद नहीं है। वास्तव में, इनमें गहरी समानताएँ हैं। ये सभी प्रकृति की पूजा करते हैं और पेड़, पहाड़, पत्थर, जल और धरती माता का सम्मान करते हैं।
उन्होंने ये भी बताया कि जैसे सनातन और हिंदू में कई जातियों और 36 प्रकार के देवी-देवता हैं, वैसे ही देश में 700 से ज्यादा जनजातियाँ और झारखंड में 32-33 जातियाँ हैं, जिनके अपने-अपने ग्राम देवता हैं। यही विविधता में एकता का प्रतिनिधित्व करती है जो सनातन, हिंदू और सरना की साझा पहचान में देखी जा सकती है।
मरांडी ने आगे कहा कि कांग्रेस और झामुमो के लोग भ्रामक प्रचार में लगे हैं कि आदिवासियों को हिंदू बनाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि हिंदू बनाने की कोई परंपरा नहीं है। यदि ऐसा होता तो केवल क्रिश्चियन और मुसलमान ही बनते; सरना, सनातन और हिंदू तो जन्मजात होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस आज भी अंग्रेजों की विभाजनकारी नीतियों पर चल रही है। उन्होंने यह दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद महात्मा गांधी ने कांग्रेस को भंग करने की सलाह दी थी, जिसे अनसुना कर दिया गया। अब जब कांग्रेस का वजूद संकट में है, तो यह पार्टी समाज में दरार डालने के लिए भाजपा और आरएसएस पर आदिवासियों के हिंदूकरण का झूठा आरोप लगा रही है।
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर वोट बैंक की राजनीति के कारण आदिवासी परंपराओं और रूढ़ियों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पेसा कानून की नियमावली में बदलाव करके आदिवासियों के मूल अधिकारों पर चोट की गई है।
उन्होंने सरकार की खामोशी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहाँ आदिवासियों को सुदृढीकरण के नाम पर क्रिश्चियन और कलमा पढ़ाकर मुसलमान बनाया जा रहा है, वहाँ कांग्रेस और झामुमो मूक दर्शक बने हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस सरकारी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि समाज अब जागरूक हो चुका है।