कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान वार्ता से सेंसेक्स और निफ्टी में महत्वपूर्ण वृद्धि

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान वार्ता से सेंसेक्स और निफ्टी में महत्वपूर्ण वृद्धि

मुंबई, 23 मई। कच्चे तेल की कीमतों में कमी और अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता की सूचना से बाजार की भावना में सुधार हुआ, जिसके परिणामस्वरूप इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांकों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। निफ्टी ने इस सप्ताह 0.32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और अंतिम कारोबारी दिन पर यह 0.27 प्रतिशत बढ़कर 23,719 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 231 अंक या 0.31 प्रतिशत की बढ़त आई और यह 75,415 पर समापन हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.24 प्रतिशत की बढ़त रही।

एक विश्लेषक के अनुसार, "बाजार में सुधार होने के बावजूद निवेशक अभी भी सतर्क हैं। उच्च स्तरों पर ठोस खरीदारी की कमी ने बाजार की तेजी को सीमित कर दिया।"

इस सप्ताह आईटी सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। हाल की गिरावट के बाद इस क्षेत्र में आकर्षक मूल्यांकन के चलते निवेशकों की रुचि बढ़ी।

रियल एस्टेट, सीमेंट और निजी बैंकों में भी मजबूती बनी रही, जबकि एफएमसीजी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के क्षेत्र में कमजोरी देखने को मिली। थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के प्रभाव से कंपनियों के लाभ पर दबाव की चिंता बनी रही।

मिडकैप इंडेक्स ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप100 ने 1.36 प्रतिशत की वृद्धि की, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.41 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और मध्य पूर्व में तनाव कम करने के प्रयासों ने रुपए को भी सहारा दिया।

हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत और सख्त मौद्रिक नीति की चिंताओं के कारण घरेलू बॉंड यील्ड में वृद्धि हुई।

विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह अमेरिकी 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इससे बढ़ती महंगाई, ऊंची ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

इससे लंबी अवधि तक उच्च ब्याज दरों की आशंका और प्रबल हुई है, जिसका प्रभाव वैश्विक तरलता और जोखिम भरे निवेशों पर पड़ेगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी 50 के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है, जबकि 23,400 से 23,300 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र रहेगा।

बैंक निफ्टी में 54,200 के स्तर के आस-पास तत्काल रेजिस्टेंस की उम्मीद है, जबकि 53,600 से 53,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।

एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने इस सप्ताह भी बड़े पैमाने पर बिक्री जारी रखी, जिससे कुल निकासी लगभग 7,570 करोड़ रुपए रही।

निवेशकों की निगाहें अब भारत के अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर हैं, जो यह संकेत दे सकते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हालिया कमजोरी अस्थायी है या स्थायी है।

साथ ही, आरबीआई की जून की मौद्रिक नीति और अमेरिका के कोर पीसीई आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे। यदि पीसीई आंकड़े अपेक्षाकृत अधिक आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में एफआईआई निवेश में कमी आ सकती है।