कब्ज और अपच से मुक्ति का उपाय: शीर्षासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें

कब्ज और अपच से मुक्ति का उपाय: शीर्षासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें

नई दिल्ली, 25 मई। भारतीय योग की परंपरा में शरीर और मन को सही दिशा में ले जाने के लिए अनेक आसनों का वर्णन किया गया है, लेकिन शीर्षासन विशेष रूप से स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह न केवल शरीर को संतुलित रखता है, बल्कि एकाग्रता को भी बढ़ाता है। शीर्षासन संस्कृत के शब्दों 'शीर्ष' (सिर) और 'आसन' (मुद्रा) से मिलकर बना है। इसे 'आसनों का राजा' कहा जाता है, और इसके नियमित अभ्यास से कंधे, भुजाओं और कोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, शीर्षासन एक उन्नत और प्रभावशाली योगासन है, जो शारीरिक ताकत, मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। यह चेहरे पर स्वाभाविक चमक लाने के साथ-साथ बालों के झड़ने को रोकने और उनके विकास में सहायक माना जाता है।

इसके अलावा, यह पेट से संबंधित समस्याओं जैसे कब्ज, गैस और अपच में आराम प्रदान करने में भी सहायक साबित हो सकता है। उल्टे खड़े होने की स्थिति में शरीर में रक्त संचार की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाता है, जिससे पाचन क्रिया को भी लाभ होता है।

शीर्षासन करते समय, विशेषकर सिर की दिशा में रक्त संचार में सुधार होता है। जब व्यक्ति उल्टे खड़े होते हैं, तो मस्तिष्क की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। फिर भी, रक्तचाप से जुड़े लाभ व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करते हैं, इसलिए उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित लोगों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

इसे करने के लिए, पहले पैरों को दीवार के सहारे रखें और धीरे-धीरे उन्हें ऊपर की तरफ उठाएं। इस दौरान शरीर का वजन हाथों और भुजाओं पर संतुलित रखें। फिर सावधानीपूर्वक सिर को चटाई पर रखें और धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं, ताकि शरीर शीर्षासन की सही मुद्रा में आ सके। इस आसन के दौरान संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें भुजाएं और कंधे मुख्य भूमिका निभाते हैं। शुरुआती अवस्था में दीवार का सहारा लेना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होता है।

शुरुआत में इसका अभ्यास केवल 10 से 30 सेकंड तक करना चाहिए। नियमित अभ्यास के साथ, व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इस समय को धीरे-धीरे बढ़ा सकता है।