लातेहार, 22 मई। देश और दुनिया में आदिशक्ति से जुड़े अनेक अद्भुत और चमत्कारी मंदिरों की कथाएं हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था को और अधिक बल प्रदान करती हैं। झारखंड के लातेहार जिले में स्थित एक प्राचीन देवी मंदिर इस श्रेणी में आता है, जहां आध्यात्मिक रहस्य और गहरी आस्था एक साथ देखी जा सकती है।
यह दिव्य मंदिर एनएच-99 पर चंदवा और बालूमाथ के मध्य स्थित है, जो चंदवा नगर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर हरे-भरे पहाड़ों की तलहटी में बना हुआ है। चारों ओर फैली हरियाली, शांति और ऊंची पहाड़ियां इस स्थान को धार्मिक पर्यटन के लिए विशेष बनाती हैं।
झारखंड सरकार के लातेहार जिला पोर्टल पर इस मंदिर की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। माता उग्रतारा का यह मंदिर आदिशक्ति का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां सामान्य नवरात्रि की 9 दिनों की परंपरा के बजाय 16 दिनों तक भक्तों की आस्था का प्रवाह बना रहता है। मंदिर की विशेषता फूल गिरने और पान के आसन से गिरने से संबंधित अनोखी मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। टोरी क्षेत्र के शासक पिताम्बर नाथ शाही एक बार शिकार करने के दौरान मांकरी गांव में पहुंचे। प्यास लगने पर जब वह जोड़ा तालाब पर गए, तब उन्हें मां लक्ष्मी और मां उग्रतारा की दो प्रतिमाएं मिलीं। उन्होंने कुछ दिन पहले इन्हें सपने में देखा था, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने यहाँ मंदिर बनाने का निश्चय किया।
मंदिर से जुड़ी एक और कहानी रानी अहिल्याबाई होल्कर से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कर सभी वर्गों को पूजा का समान अधिकार प्रदान किया था। उन्होंने जाति और धर्म के भेदभाव को खत्म करते हुए इसे सभी के लिए खोला।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां दुर्गा पूजा 16 दिनों तक मनाई जाती है। जितिया त्योहार के दूसरे दिन से पूजा का आरंभ होता है, जिसमें पहले दिन कलश स्थापना के साथ अष्टभुजी माता की पूजा होती है। नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा विधियों का पालन किया जाता है। 16वें दिन विजयादशमी पर माता को पान अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि यदि पान आसन से गिरता है, तो इसे मां की ओर से विसर्जन की अनुमति समझा जाता है। कभी-कभी पान रात भर नहीं गिरता और आरती का आयोजन चलता रहता है।
यहां एक और मान्यता भी है जो फूलों से जुड़ी है। भक्त जब अपनी मनोकामना पूरी होने की आशा में फूल अर्पित करते हैं, यदि ये जल्दी गिर जाएं तो इसे मां की स्वीकृति माना जाता है।
यह देवी का मंदिर केवल झारखंड के ही नहीं, बल्कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है। यहां हिंदू धर्म के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी आते हैं। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह जगह आध्यात्मिकता के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी बहुत लोकप्रिय है। आसपास के प्राकृतिक दृश्य और शांति पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं।
यह मंदिर लातेहार जिला मुख्यालय से लगभग 37 किलोमीटर और रांची से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर चंदवा-चतरा मुख्य मार्ग पर स्थित है। यहां पहुँचने का सबसे प्रमुख साधन सड़क मार्ग है। मंदिर के निकटतम टोरी जंक्शन रेलवे स्टेशन लगभग 10 किलोमीटर दूर है। श्रद्धालु रांची से चंदवा होते हुए आसानी से मंदिर पहुँच सकते हैं।