रांची, 22 मई। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) के भाषा नियमावली से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति की दूसरी बैठक में शुक्रवार को कोई सहमति नहीं बन सकी। इसमें भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में परीक्षा में शामिल करने के बारे में मंत्रियों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आए। अब इस स्थिति का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा लिया जाने की संभावना है।
ज्ञात हो कि हाल ही में कैबिनेट ने जेटेट की परीक्षा को लेकर भाषा नियमावली को मंजूरी दी थी, जिसमें उपरोक्त भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के तौर पर शामिल नहीं करने पर विवाद की शुरुआत हुई थी। इसके समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने पांच मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में मंत्री संजय प्रसाद यादव और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका का समर्थन करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के कई उम्मीदवार इन भाषाओं का उपयोग करते हैं और उन्हें परीक्षा से बाहर रखना उचित नहीं होगा।
इस बैठक में मौजूदा भाषा पैटर्न पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। समिति के कुछ सदस्य उस नियम पर सवाल उठा रहे थे, जिसमें उम्मीदवारों के लिए 15 जनजातीय भाषाओं में से एक का चुनाव करना आवश्यक है।
सदस्यों का कहना था कि पलामू, गढ़वा और चतरा जैसे कई जिलों में इन भाषाओं का व्यावहारिक उपयोग बहुत कम है, जिससे वहां के युवाओं को नुकसान हो सकता है। बैठक के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने समिति के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान के संवेदनशील मुद्दों पर अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है।
बैठक में कार्मिक और शिक्षा विभाग से यह भी जानकारी मांगी गई थी कि पिछले परीक्षाओं में अभ्यर्थियों ने किस भाषा का चयन किया था, लेकिन विभाग स्पष्ट आंकड़े पेश नहीं कर सका। इससे कई मंत्रियों ने नाराजगी व्यक्त की और विभाग की तैयारी पर सवाल उठाए। बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सभी सदस्यों के सुझाव और असहमति के बिंदुओं को एकत्रित किया जा रहा है और एक-दो दिनों में पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को प्रस्तुत की जाएगी।