जकड़न से राहत के लिए 'मलासन' का लाभ उठाएं: जानें इसके फायदे

जकड़न से राहत के लिए 'मलासन' का लाभ उठाएं: जानें इसके फायदे

नई दिल्ली, 20 मई। भारतीय योग की परंपरा में शरीर के विकास और ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने के लिए कई महत्वपूर्ण आसनों का वर्णन किया गया है, जिसमें 'मलासन' एक प्रभावी योग मुद्रा मानी जाती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर की लचीलापन और संतुलन में सुधार होता है। यह न केवल पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, बल्कि रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत करता है और शरीर के निचले हिस्से को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही, यह सही शारीरिक मुद्रा और सांसों के तालमेल को भी बेहतर बनाता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन के अभ्यास के संबंध में जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, यह 'स्क्वाट' मुद्रा के समान है, जिसमें व्यक्ति अपने घुटनों को मोड़कर और कूल्हों को जमीन की ओर लाते हुए बैठता है। इसे करने के लिए पैरों को कंधे की चौड़ाई के बराबर फैलाकर धीरे-धीरे स्क्वाट की स्थिति में आना चाहिए। मलासन की मुद्रा में संतुलित छोटे कदमों के साथ शरीर को स्थिर रखना आवश्यक है। यह आसन सुबह के समय खाली पेट करना सबसे फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है।

यह एक ऐसा योगासन है, जो शरीर को स्थिरता प्रदान करता है और मन को एकाग्रता में सहायता करता है। यह आसन मूलाधार चक्र को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति में सुरक्षा, संतुलन और जागरूकता का अनुभव बढ़ता है।

शारीरिक दृष्टिकोण से, मलासन कई अंगों को मजबूत और लचीला बनाता है। यह नितंब, जांघों, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों को सशक्त बनाते हुए कमर, पीठ के निचले हिस्से और टखनों में खिंचाव देकर जकड़न को कम करता है। लंबे समय तक बैठने से होने वाली जकड़न को दूर करने में भी यह आसन बेहद मददगार साबित होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने हेतु एक उत्कृष्ट अभ्यास माना जाता है। फिर भी, उन्हें इसे करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।

जिन्हें गंभीर घुटने, टखने, या पीठ के निचले हिस्से में दर्द का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें इस आसन से दूर रहना चाहिए। यदि हाल ही में पेट या कूल्हे की कोई सर्जरी हुई हो, तो भी इसे नहीं करना चाहिए।