जैव विविधता दिवस 2026: पृथ्वी की सुरक्षा की वैश्विक आवाज

जैव विविधता दिवस 2026: पृथ्वी की सुरक्षा की वैश्विक आवाज

नई दिल्ली, 21 मई। 22 मई केवल एक सामान्य तारीख नहीं है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर 'जैव विविधता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों, पौधों, सूक्ष्मजीवों और पारिस्थितिक तंत्रों के विविधता के महत्व को समझाना एवं उनके संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। वर्तमान में जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है, जैव विविधता की अहमियत पहले से कहीं और अधिक बढ़ गई है। यह सिर्फ वन्य जीवों या दुर्लभ पौधों तक सीमित नहीं है; इसके अंतर्गत फसलों की विभिन्न किस्में, पशुधन की नस्लें और विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र भी आते हैं, जैसे झीलें, जंगल, रेगिस्तान और कृषि क्षेत्र।

धरती पर लगभग 80 लाख प्रजातियों की उपस्थिति बताई जाती है, जिनमें से लगभग 10 लाख प्रजातियां विलुप्ति के संकट का सामना कर रही हैं। यह आंकड़ा मानव गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव की गंभीरता को दर्शाता है। फिर भी निराश होने की कोई बात नहीं है; दुनिया भर में ऐसे अनेक प्रयास चल रहे हैं जिनका लक्ष्य उन पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्जीवित करना है, जो कभी लुप्तप्राय प्रजातियों का आश्रय स्थल थे। इन पहलों के माध्यम से कई संकटग्रस्त स्तनधारी, सरीसृप और पक्षी प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मानवता का अस्तित्व भी जैव विविधता पर निर्भर है। मछलियां लगभग 3 अरब लोगों के लिए 20 प्रतिशत पशु प्रोटीन का स्रोत बनती हैं। मानव आहार का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पौधों से प्राप्त होता है। विकासशील देशों के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले करीब 80 प्रतिशत लोग आज भी पारंपरिक वनस्पति-आधारित दवाओं पर निर्भर हैं। इस प्रकार, जैव विविधता को मानव जीवन की नींव माना जा सकता है। हालांकि, जैव विविधता के घटाव का असर न केवल प्रकृति बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा होता जा रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि जैव विविधता की कमी से जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों, जिसे जूनोसिस कहते हैं, का जोखिम बढ़ता है। इसके विपरीत, यदि जैव विविधता बनी रहती है, तो यह कोविड-19 जैसी महामारियों से निपटने में भी सहायक हो सकती है। स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने इसी परिप्रेक्ष्य में प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य लोगों में यह भावना विकसित करना है कि जैव विविधता केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जल और भविष्य की सुरक्षा से भी संबंधित है।

जल संसाधनों के संरक्षण में भी जैव विविधता की अहम भूमिका होती है। नदी किनारे के वन प्राकृतिक जल शोधन की तरह कार्य करते हैं, जो पानी को साफ और संरक्षित रखते हैं। वनस्पतियां वर्षा चक्र को नियंत्रित करने, भूजल को पुनर्भरित करने और मिट्टी को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं, जिससे जल की परिरक्षण क्षमता बढ़ती है और प्रदूषण का प्रभाव घटता है। कृषि और खाद्य सुरक्षा भी जैव विविधता पर निर्भर करती हैं। भोजन में विविधता न केवल पोषण में सहायता करती है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और खानपान की आवश्यकताओं को भी पूरा करती है। साथ ही, जैव विविधता पोषक तत्वों का चक्र, कार्बन अवशोषण, कीट नियंत्रण और परागण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी सेवाएं देती है।

औद्योगिक खेती और फैक्ट्री फार्मिंग जैव विविधता की हानि का एक बड़ा कारण बन गई हैं। ब्राजील सहित कई देशों में पशुधन के लिए सोयाबीन की खेती हेतु बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जा रही है। इससे वन्य जीवों और पारिस्थितिक तंत्रों पर बुरा असर पड़ रहा है। विश्व स्तर पर भूमि उपयोग में होने वाले 80 प्रतिशत परिवर्तनों के पीछे कृषि क्षेत्र का हाथ माना जाता है। अमेज़न वर्षावन जैसे क्षेत्रों में वनों की कटाई, आग और आवास क्षति ने अनगिनत प्रजातियों को संकट में डाल दिया है।

वन्य जीवों का व्यावसायिक दोहन भी जैव विविधता के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है। पर्यटन, पारंपरिक चिकित्सा और वन्य जीव पालन जैसे उद्योग जानवरों को उनके प्राकृतिक निवास से हटा रहे हैं। इसका नतीजा पारिस्थितिक संतुलन में बिगड़ाव और प्रजातियों के विलुप्त होने की गति में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है। बढ़ती मांग से अवैध वन्यजीव व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है, जो आक्रामक प्रजातियों के प्रसार और प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाने का कारण बनता है। जैव विविधता की रक्षा के लिए वन्य जीवों के आर्थिक शोषण को रोकना अत्यंत आवश्यक है।