जगुआर फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स की कमी का समाधान, भारतीय वायुसेना स्वदेशी विकल्प पर कार्यरत

जगुआर फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स की कमी का समाधान, भारतीय वायुसेना स्वदेशी विकल्प पर कार्यरत

नई दिल्ली, 22 मई। जगुआर फाइटर जेट, जो डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक के लिए जाना जाता है, वर्तमान में उन समस्याओं का सामना कर रहा है जो पहले मिग-21 जेट्स के लिए थी, यानी स्पेयर पार्ट्स की किल्लत। खबरों के अनुसार, भारत ही इस समय जगुआर फाइटर जेट का संचालन करने वाला एकमात्र देश है। जिन कंपनियों ने जगुआर के पार्ट्स बनाए हैं, उन्होंने स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में असमर्थता जताई है।

भारतीय वायुसेना ने इस बाबत अपनी क्षमताओं के रोडमैप में जानकारी दी है। दस्तावेज में बताया गया है कि जगुआर विमानों में उपयोग की जाने वाली मार्टिन-बेकर इजेक्शन सीटों की वारंटी समाप्ति का मुद्दा सामने आया है। इसका प्रमुख कारण मूल उपकरण निर्माता द्वारा स्पेयर पार्ट्स की अनुपलब्धता बताया गया है, और मार्टिन-बेकर ने आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की 250 से अधिक लाइनों की आपूर्ति करने में असमर्थता प्रकट की है।

इस चुनौती का समाधान करने के लिए वायुसेना मौजूदा इजेक्शन सीटों की मरम्मत स्वयं कर रही है। हालांकि, एयरफोर्स का मानना है कि इन सीटों को और अधिक अप्रचलित होने से बचाने के लिए एक स्थायी समाधान की जरुरत है। इजेक्शन सीटों के आकार, फिटिंग, कार्यक्षमता और सामग्री से जुड़े मानकों को भी पूरा करना आवश्यक है। इसलिए, एयरफोर्स अब देश में इस समस्या का समाधान खोजने में जुट गई है।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, किसी भी विमान को उड़ान भरने से पहले कई प्रकार की सावधानीपूर्वक जांच से गुजरना आवश्यक होता है। इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल होता है कि सभी पुर्जे सही ढंग से कार्य कर रहे हैं, किस प्रकार का एम्यूनिशन लोड किया गया है, और सभी प्रणालियाँ सुचारू हैं। इसके अलावा, ईंधन की मात्रा जैसे कई महत्वपूर्ण परीक्षण भी किए जाते हैं। इन सभी जानकारियों को एक फॉर्म में दर्ज किया जाता है, जिसे फॉर्म-700 कहा जाता है। सभी जांच अधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद यह फॉर्म पायलट को सौंपा जाता है, लेकिन यदि फॉर्म-700 में कोई समस्या है, तो उस विमान को उड़ान की अनुमति नहीं दी जाती।

इजेक्शन सीटें किसी विमान का अभिन्न हिस्सा होती हैं। यदि बर्ड हिट, इंजन में खराबी, या किसी अन्य तकनीकी समस्या के कारण पायलट को विमान छोड़ना पड़े, तो यह सीट उसे सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का कार्य करती है। चूंकि मूल उपकरण निर्माता के द्वारा स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता नहीं हो रही है, इसलिए इजेक्शन सीट में शामिल कई महत्वपूर्ण पुर्जों की उम्र समाप्त होने पर विमान का उड़ान भरना संभव नहीं होगा। यही कारण है कि एयरफोर्स ने पार्ट्स की आयु समाप्त होने से पहले स्वदेशी समाधान खोजना प्रारंभ कर दिया है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास जगुआर के 6 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें हाल ही में अपग्रेड किया गया है।

भारतीय वायुसेना के मौजूदा बेड़े की स्थिति को देखते हुए, मिग-21 के विभिन्न वेरिएंट जैसे 'मिग-21 बिस, मिग-21 टाइप-96, मिग-27 और मिग-21 बाइसन' पहले ही सेवा से हटाए जा चुके हैं। मिग-29 भी 2030 से क्रमबद्ध तरीके से सेवा से बाहर होंगे। इसके बाद मिराज-2000 के 3 स्क्वाड्रन और जगुआर के 6 स्क्वाड्रन भी धीरे-धीरे सेवा से बाहर जाएंगे। इसका मतलब है कि 2035 तक वायुसेना का पुराना फाइटर बेड़ा लगभग पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

इस कमी को पूरा करने के लिए, एयरफोर्स स्वदेशी फाइटर जेट तेजस मार्क-1ए और 114 मल्टी-रोल फाइटर विमानों की खरीद पर निर्भर कर रही है। एचएएल के साथ कुल 220 तेजस फाइटर जेट की खरीद का अनुबंध किया गया है। अब तक तेजस मार्क-1 के 38 जेट वायुसेना में शामिल किए जा चुके हैं, जबकि 180 तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी अभी नहीं हुई है।