नई दिल्ली, 25 मई। विश्व योग दिवस में अब केवल 28 दिन बचे हैं। इस अवसर पर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय प्रतिदिन एक नए योगासन के अभ्यास और इसके लाभों की जानकारी साझा कर रहा है। इसी क्रम में, मंत्रालय ने मत्स्यासन पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है।
मंत्रालय का कहना है कि मत्स्यासन का नियमित अभ्यास आंखों के तनाव, गले में असुविधा, पीठ की कठोरता, और शरीर के संतुलन और लचीलेपन में कमी की आम समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर है। आज के व्यस्त शेड्यूल, बढ़ते स्क्रीन टाइम और गलत बैठने की आदतों की वजह से कई लोग इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ये सभी संकेत देते हैं कि शरीर को फिर से लचीला और संतुलित बनाने की आवश्यकता है। मत्स्यासन इसका प्राकृतिक उपाय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मत्स्यासन गले, छाती और कंधों को खोलने में मदद करता है। इससे गले की मांसपेशियों की असुविधा कम होती है और थायरॉइड ग्रंथि स्वस्थ रहती है। आंखों के चारों ओर की मांसपेशियों पर से तनाव कम होता है। यह आसन पीठ की कठोरता को घटाकर कमर और रीढ़ के लिए मजबूती प्रदान करता है। नियमित रूप से यह अभ्यास शरीर के संतुलन और लचीलेपन को बनाए रखने में सहायक होता है, साथ ही यह श्वास संबंधी समस्याओं में भी राहत प्रदान करता है और मानसिक शांति में सहायक है।
मत्स्यासन करने के लिए पीठ के बल सीधे लेटें, हाथों को शरीर के बगल में रखें और हथेलियों को नीचे की ओर रखते हुए कूल्हों के पास रखें। फिर कोहनियों पर टिककर छाती को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर झुकाएं, ताकि सिर का ऊपरी भाग जमीन को छू सके। आप अपने पैरों को सीधे या कमलासन की मुद्रा में रख सकते हैं। इस स्थिति में सामान्य श्वास लेते हुए 15 से 30 सेकंड तक बने रहें।
मत्स्यासन एक सरल लेकिन प्रभावी योगासन है, जिसे घर पर किया जा सकता है और यह आधुनिक जीवन की विभिन्न शारीरिक समस्याओं से राहत प्रदान करता है। नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि मन भी खुश और ऊर्जा से भरा रहेगा। हालांकि, कुछ सावधानियों का पालन करना भी आवश्यक है।
गर्दन या पीठ की गंभीर समस्याओं वाले व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।