नई दिल्ली, 24 मई। कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने लाहौर में सड़कों के पूर्व नामों की पुनर्स्थापना, अमेरिका और भारत के संबंध, दिल्ली जिमखाना क्लब और तमिलनाडु की राजनीति के मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
लाहौर में विभाजन से पहले के नामों को फिर से बहाल करने पर इमरान मसूद ने कहा कि जब किसी समाज को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास को खत्म करने की कोशिश होती है, तो वो अंततः अपने निर्णयों के परिणामों को समझता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में हिंदू जनसंख्या अब बेहद कम रह गई है, फिर भी वहां प्राचीन हिंदू नामों की पुनर्स्थापना की जा रही है।
मसूद ने उल्लेख किया कि लाहौर में राम गली, सुदर्शन चौक और हरि घाट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का पुनर्विकास किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि यह अतीत की गलतियों और सामाजिक विभाजन के दाग को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना किसी भी समाज की जिम्मेदारी होती है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा और भारत-अमेरिका समझौतों पर मसूद ने कहा कि उन्हें स्पष्ट नहीं है कि रूबियो का दौरा किस उद्देश्य से हो रहा है, लेकिन भारत द्वारा अमेरिका के साथ किए गए कुछ समझौते आम लोगों के हित में नहीं नजर आते।
उन्होंने बताया कि भारत एक विकासशील राष्ट्र है और महंगाई का सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ता है। मसूद ने यह भी कहा कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव का कारण अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियां भी हैं।
दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन पर केंद्र सरकार द्वारा दोबारा कब्जा लेने और उसे खोलने के आदेश पर भी उन्होंने अपने विचार रखे।
मसूद ने कहा कि जिमखाना क्लब मुख्यतः एलीट वर्ग से जुड़ा संस्थान माना जाता है और इस मुद्दे पर चल रही चर्चाएं आम जनता की समस्याओं से अलग दिखाई देती हैं।