मुर्शिदाबाद, 23 मई। गोवंश की कुर्बानी पर दिए बयान के चलते हो रहे विवाद के बीच, हुमायूं कबीर ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इस्लामिक विद्वान हाजी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि उनकी टिप्पणियों का उन पर कोई असर नहीं है, और वे अपने अधिकारों की रक्षा करते रहेंगे। कबीर का मानना है कि इस विषय को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। दरअसल, हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने कबीर के बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी को लेकर बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर सख्त सजा मिलनी चाहिए।
हुमायूं कबीर, जो पूर्व में तृणमूल पार्टी के सदस्य रह चुके हैं, ने शनिवार को इस्लामिक विद्वान हाजी के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा, "वह कौन हैं? मुझे उनकी बातें सुनने की जरूरत नहीं है। चाहे वो कौन हो, एक मुसलमान के रूप में मुझे अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, जो संविधान द्वारा मुझे दिया गया है। मैं इस अधिकार का उपयोग करना जारी रखूंगा। मेरे बारे में टिप्पणी करने का उनका कोई हक नहीं है, वे इतने महत्वपूर्ण नहीं हैं कि मुझे उनकी हर बात माननी पड़े।"
बकरीद की छुट्टी के विवाद पर भी हुमायूं कबीर ने कहा कि इसे लेकर अनावश्यक चर्चा हो रही है। उन्होंने बताया कि यह एक दिन का मामला है और जो दिन सरकार छुट्टी घोषित करेगी, वही मान्य होगा। कबीर ने कहा, "मेरे लिए 28 तारीख को कुर्बानी है, यदि उस दिन छुट्टी है तो वह अच्छा है। अगर सरकार तारीख में बदलाव करती है तो भी कोई समस्या नहीं है। अगर छुट्टी नहीं भी मिले तो इससे कोई बड़ी दिक्कत नहीं होगी।"