जालंधर, 24 मई। पंजाब के जालंधर से निकलने वाले युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स के नए इतिहास की रचना की है। रांची में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप के दौरान उन्होंने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया। इस अद्वितीय प्रदर्शन के साथ उन्होंने न केवल पंजाब का नाम ऊंचा किया, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी क्वालीफाई किया।
गुरिंदर वीर की इस सफलता के बाद पूरे पंजाब में, विशेषकर जालंधर में, जश्न का माहौल बन गया है। दौड़ खत्म होने के तुरंत बाद उन्होंने अपनी मां गुरविंदर कौर को फोन किया और भावनाओं में डूबकर पूछा, "क्या तुमने मेरी रेस देखी?" मां ने खुशी से उत्तर दिया, "हां बेटे, तुमने कमाल कर दिया।" वहीं जब उन्होंने अपने पिता कमलजीत सिंह से बात की, तो मुस्कुराते हुए बोले, "डेडी बताओ किदां?" यह सुनकर परिवार की भावनाएँ उमड़ पड़ीं।
करीब 90 वर्षीय दादी चरण कौर ने लड्डू खिलाकर अपने पोते को आशीर्वाद दिया। घर के बाहर बधाई देने वालों का तांता लग गया। गुरिंदर के दादा तरसेम सिंह पेशेवर कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं, और उनके पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस में एएसआई के तौर पर रिटायर हुए हैं, साथ ही वे एक अच्छे वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रहे हैं। परिवार की खेल पृष्ठभूमि ने गुरिंदर को शुरू से प्रेरित किया।
गुरिंदर के पिता ने बताया कि उनके बेटे को दौड़ने का शौक बचपन से ही था। वह गांव की पगडंडियों, खेतों और गलियों में तेजी से दौड़ता था। जब छोटे कुत्ते उसका पीछा करते, तो वह और तेज दौड़ने लगता। तभी परिवार को समझ आ गया था कि उनका बेटा एक बड़ा एथलीट बन सकता है। 12 साल की उम्र में उसने गंभीरता से दौड़ने की ट्रेनिंग शुरू की। उसके पिता उसे अक्सर दौड़ने के लिए ले जाते थे, लेकिन समय के साथ गुरिंदर ने उन्हें भी पीछे छोड़ दिया। वह रोज करीब 8 घंटे अभ्यास करने और अपनी फिटनेस के प्रति बेहद समर्पित रहे।
गुरिंदर की मां गुरविंदर कौर ने बताया कि बेटे की डाइट का विशेष ध्यान रखा गया। उन्हें घर का शुद्ध घी, दूध, ड्राई फ्रूट, पिन्नियां, खजूर की बर्फी और प्रोटीन युक्त खाना मिलता रहा, जिससे उनकी ताकत बनी। जब गुरिंदर 2014 में जालंधर में प्रशिक्षण के लिए गया, तो परिवार हर हफ्ते दो बार उसके लिए विशेष आहार लाते थे।
मां ने कहा कि गुरिंदर ने अपने शरीर को इस स्तर पर लाने के लिए बहुत मेहनत की है। वह घर से दूर रहकर भी अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करता था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में उनका बेटा कॉमनवेल्थ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतेगा।
गुरिंदर वीर का आत्मविश्वास इस बात से स्पष्ट है कि फाइनल रेस से पहले ही उसने अपने चेस्ट नंबर के पीछे 10.10 सेकंड का लक्ष्य लिख दिया था। फाइनल में उसने उससे भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 10.09 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया। दौड़ खत्म होने के बाद उसने अपनी छाती पर लगे नंबर की तरफ इशारा करके जश्न मनाया।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर गुरिंदर वीर को बधाई दी और कहा कि पंजाब के इस गबरू ने दो दिनों के भीतर दूसरा राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर पूरे देश और दुनिया में पंजाब का नाम ऊंचा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे पंजाब को इस उपलब्धि पर गर्व है।
अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स कोच सरबजीत सिंह ने कहा कि गुरिंदर वीर का 10.09 सेकंड का समय भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालीफिकेशन समय 10.16 सेकंड था, जिसे गुरिंदर ने आसानी से पार कर लिया और अब वह एशिया के शीर्ष धावकों में शामिल हो गए हैं।
कोच ने कहा कि भारत में 100 मीटर दौड़ में अभी तक ज्यादा सफलता नहीं मिली थी, लेकिन गुरिंदर वीर का रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक शुरुआत है; असली लक्ष्य ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में मेडल हासिल करना है।
गुरिंदर वीर महान धावक मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ट को अपना आदर्श मानते हैं और इनकी तरह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उल्लेखनीय और ऐतिहासिक प्रदर्शन करना चाहते हैं।