गांधीनगर, 24 मई। इंग्लैंड में आमों का आयात करने वाले दिग्विजय सिंह गोहिल ने कहा है कि जब लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर गुजरात के केसर और हाफूस आम के पैकेट उतरते हैं और उनकी खुशबू कार्गो क्षेत्र में फैलती है, तो मैं एक भारतीय के नाते अत्यधिक गर्व महसूस करता हूं। उन्होंने यह भी बताया कि लंदन, लेस्टर और बर्मिंघम में रहने वाले भारतीयों के लिए ये आम केवल फल नहीं हैं, बल्कि अपने वतन की मीठी यादें और खुशबू लेकर आते हैं। लोग इन्हें मुंहमांगी कीमत चुकाने के लिए भी तैयार रहते हैं। अब तो यूरोपियन भी ‘इंडियन मैंगो’ के शौकीन हो चुके हैं।
गोहिल ने आगे कहा कि भारत के अलावा विश्वभर में आम की कई किस्में पाई जाती हैं, लेकिन गुजरात का केसर आम और महाराष्ट्र का हाफूस सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। केसर आम की मांग सबसे अधिक है क्योंकि इसकी सुगंध और मिठास विश्व के किसी अन्य आम में नहीं मिलती। जहां ब्राजील और पेरू के आम देखने में सुर्ख लाल होते हैं, वहीं उनका स्वाद काफ़ी सामान्य होता है, जबकि भारत का केसर आम ‘स्वाद का राजा’ कहलाता है।
आम के निर्यात के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) से मान्यता प्राप्त बागों और पैक हाउस में प्रोसेसिंग की जाती है।
राजकोट के कुवाड़वा स्थित एपीडा के मान्यता प्राप्त कुंज कोल्ड वेयर सॉल्यूशन के मालिक समीर सापरिया ने कहा कि हम अपने पैक हाउस में आमों की प्रोसेसिंग करते हैं। हम अमेरिका, इंग्लैंड, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और खाड़ी के देशों के लिए आमों को प्रोसेस और पैक करते हैं।
अमेरिका के लिए निर्यात करने में हम विशेष हॉट वॉटर प्रोसेस का उपयोग करते हैं, जिसे उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिल रही है। इंग्लैंड और कनाडा के लिए भी हॉट वॉटर ट्रीटमेंट के बाद पैकिंग की जाती है। हम केसर, राजापुरी और अल्फांसो (हाफूस) आम की प्रोसेसिंग करते हैं। केसर आम जूनागढ़, तालाळा और कच्छ से आता है, जबकि राजापुरी आम वलसाड से होते हैं।
आम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘ग्लोबल प्रोडक्ट’ बनाने की प्रक्रिया भी काफी रोचक है।
डी-सेपिंग: जब आम सही पकने की अवस्था पर पहुंचते हैं, तो उन्हें सुबह में ठंडे वातावरण में तोड़कर पैक हाउस में लाया जाता है। यहां सबसे पहले डी-सेपिंग की प्रक्रिया होती है। आमों को विशेष कन्वेयर बेल्ट पर उल्टा रखा जाता है ताकि डंठल का रस निकल जाए, जिससे आम काले नहीं पड़ते और लंबे समय तक ताजे रहते हैं।
हॉट वॉटर ट्रीटमेंट: हरे आमों को तोड़कर 48 से 52 डिग्री सेल्सियस के गर्म पानी में लगभग 10 मिनट तक रखा जाता है।
इस प्रक्रिया से आमों में होने वाले एन्थ्रेक्नोज और सड़न पैदा करने वाले फंगस समाप्त हो जाते हैं, साथ ही फल मक्खी के अंडे और इल्ली भी मारे जाते हैं। गर्म पानी से आम में प्राकृतिक 'एथिलीन' गैस सक्रिय हो जाती है, जिससे सभी आम समान रूप से पकते हैं।
हाइड्रो-कूलिंग: गर्म पानी से निकाले गए आमों को 10 से 15 डिग्री सेल्सियस के ठंडे पानी में 10 मिनट के लिए रखा जाता है। इसके बाद इन्हें हवा में सुखाया जाता है। ठंडक के कारण आम की श्वसन दर कम हो जाती है, जिससे वे लंबे समय तक ताजे रहते हैं। इसके छिलके मजबूत होते हैं और पकने पर उनका रंग पीला और आकर्षक होता है।
पैक हाउस के मालिक समीर सापरिया ने कहा, "जब उत्पाद में गुणवत्ता हो और उसे आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कर सकता है। गिर के बागों का केसर आम अब एक वैश्विक ब्रांड बन गया है।"
किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के द्वारा किसान खुद अपने तरीके से सीधे विदेशों में आम का निर्यात करके डॉलर और पाउंड कमा सकते हैं। यदि किसान समूह बनाकर समान उत्पादन और निर्यात करें, तो सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार की सब्सिडी और सहायता मिलती है। सापरिया ने कहा कि यदि किसी किसान को मदद या मार्गदर्शन की आवश्यकता है, तो उन्हें पूरी सहायता प्रदान की जाएगी।
निर्यातकों का कहना है कि न सिर्फ आम, बल्कि 2026 के मानसून के बाद से जी-फोर मिर्च, भिंडी, करेला, तोरई और गिलकी जैसी गुजरात की प्रीमियम सब्जियों को भी इसी आधुनिक प्रोसेसिंग के द्वारा विदेशी बाजारों में भेजने की योजना बनाई गई है।