कच्छ, 20 मई। गुजरात के रेगिस्तानी कच्छ इलाके में मवेशी पालन करने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए ऊंटनी का दूध एक नया आय का स्रोत बन गया है।
पहले ऊंटनी का दूध बहुत कम मूल्य पर बिकता था, लेकिन राज्य सरकार की कुछ नवीन और अनोखी योजनाओं के कारण अब पशुपालक आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
हाल ही में खोली गई 'सरहद डेयरी' ने दूध की खरीद के लिए एक व्यवस्थित तंत्र स्थापित किया है, जिससे ऊंट पालक 50 से 55 रुपए प्रति लीटर की दर पर दूध बेच पा रहे हैं। ऊंट पालकों का कहना है कि अब उन्हें दूध बेचने या भुगतान प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं होती।
आशाभाई रबारी का कहना है कि पहले हमारा जीवन कठिनाइयों से भरा था। लेकिन सरकार की मदद और दुग्ध संघ के मार्गदर्शन से हमारे ऊंटों की सुरक्षा हो गई; वरना कोई हमारी चिंता नहीं करता। अब जीवन काफी आसान हो गया है।
देवभाई रबारी ने बताया कि अब हम ऊंटनी का दूध डेयरी को भेजते हैं, जिसके लिए हमें 50 रुपए प्रति लीटर मिलते हैं।
चूंकि ऊंट पालकों का कोई निश्चित स्थान नहीं होता, इसलिए उन्हें चारे की तलाश में घूमना पड़ता है, जिससे दूध बेचना कठिन हो जाता है। फिर भी, सरहद डेयरी ने इस प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है।
यह देश की अनूठी डेयरी है, जो केवल ऊंटनी का दूध ही नहीं खरीदती, बल्कि उससे विभिन्न उत्पाद भी बनाती है, जैसे दूध, पनीर और आइसक्रीम।
वर्ष 2025-26 में, सरहद डेयरी ने प्रतिदिन औसतन 5,158 लीटर दूध खरीदा, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 4,754 लीटर था।
पिछले वर्ष, सरहद डेयरी ने ऊंट पालकों को उनके दूध के लिए लगभग 8.72 करोड़ रुपए का भुगतान किया, जबकि इस वर्ष यह राशि बढ़कर लगभग 9.60 करोड़ रुपए हो गई है।
यह कार्यक्रम यहां के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
ऊंटनी का दूध अक्सर 'सुपरफूड' माना जाता है। यह कई औषधीय गुणों से समृद्ध होता है और इसका सेवन टीबी, मधुमेह, ऑटिज्म और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में लाभदायक माना जाता है। इसकी मांग देश और विदेश दोनों जगह काफी है।