गो संरक्षण की सफलता: यूपी का मॉडल वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा

गो संरक्षण की सफलता: यूपी का मॉडल वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा

लखनऊ, 24 मई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ का सिद्धांत अब अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने अपनी क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। इस मॉडल ने न केवल प्रदेश में 10 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यापार स्थापित किया है, बल्कि यूके, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित 10 से अधिक देशों में 'मेड इन यूपी' के गो उत्पादों की भारी मांग भी उत्पन्न की है। यह पहल गोसेवा से बढ़कर एक मजबूत आर्थिक आधार में विकसित हो चुकी है। 'हेता' कार्यक्रम के तहत 1000 से अधिक देशी गायों पर आधारित एक नैतिक डेयरी सिस्टम की स्थापना की गई है, जिसने देशी नस्लों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई अवधारणा विकसित की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही इस मॉडल के अंतर्गत साहीवाल गाय के संरक्षण और गोपूजन कर चुके हैं।

सीएम योगी की प्रेरणा से गाजियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने इस अभियान की शुरुआत की। असीम ने 14 वर्षों तक अमेरिका सहित विभिन्न देशों की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर के रूप में कार्य किया, लेकिन बाद में उन्होंने गो संरक्षण के क्षेत्र में कदम रखा। आज वे 100 लोगों की विशेष टीम के साथ इस मिशन को न केवल संचालित कर रहे हैं, बल्कि इसे एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड में भी तब्दील कर चुके हैं।

हेता का मॉडल देशी गायों के विविध उपयोग पर केंद्रित है, जहां दूध, पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, जैविक खाद्य सामग्री और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की लगभग 150 श्रेणियों की तैयारी की जा रही है। ए2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज़, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर देखभाल उत्पाद और गोमूत्र अर्क जैसे उत्पाद तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। इस मॉडल की विशेषता यह है कि यहाँ वृद्ध गोवंश को बोझ नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें संरक्षण का आवश्यक हिस्सा माना जाता है।

हेता के उत्पाद अब भारत के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई राष्ट्रों में भी पहुँच रहे हैं, जिससे उत्तर प्रदेश की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है। पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के मुताबिक, योगी सरकार इस मॉडल को और विस्तारित करने के लिए बड़े पैमाने पर नीतिगत समर्थन प्रदान कर रही है। 'ऑपरेशन-4' के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है।

डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों के मालिक पशुपालकों को लाखों रुपये का अनुदान मुहैया किया जा रहा है। इस योजना में 15 प्रतिशत आत्मनिवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का एक स्पष्ट ढांचा स्थापित किया गया है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर सरकार का विशेष ध्यान है। राज्य में चल रही चार प्रमुख योजनाएं मिलकर डेयरी क्षेत्र को एक नई गति प्रदान कर रही हैं।

इसके परिणामस्वरूप किसान अब देशी गायों के माध्यम से करोड़ों की आय कमा रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। योगी सरकार का यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल अब केवल एक योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक डेयरी शक्ति बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन चुका है।