नोएडा, 22 मई। गौतमबुद्धनगर के साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह नकली कंपनियों का निर्माण कर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों में करंट अकाउंट खोलता था और उन खातों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी से इकट्ठा की गई धनराशि को ट्रांसफर कर वैधता प्रदान करता था। पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, नकद, मोहर, और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कई फर्जी कंपनियों का गठन कर उनके नाम पर बैंक खातों को खोला था, जिसका उपयोग वे देशभर में साइबर धोखाधड़ी की रकम को इकट्ठा करने और विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए करते थे, ताकि धनराशि को वैध दिखाया जा सके। प्रारंभिक जांच में इन खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और अन्य राज्यों में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित अनेक शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं और कितने बैंक खातों का साइबर अपराध में इस्तेमाल किया गया है।
साइबर क्राइम पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपियों के खिलाफ गौतमबुद्धनगर के साइबर क्राइम थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। बरामद सामान में पांच मोबाइल फोन, 2800 रुपये, एक मोहर और कई दस्तावेज शामिल हैं।
पुलिस ने आम जनता को साइबर अपराध से सुरक्षित रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा कि लोग अनजान व्यक्तियों के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता या फर्म रजिस्टर न करवाएं और किसी को भी अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने की अनुमति न दें। इसके साथ ही ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी और नेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारियों को साझा न करने की अपील की गई है। साइबर पुलिस ने यह भी कहा कि यदि किसी को बैंक खाते में संदिग्ध लेन-देन दिखे या वह किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाए, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।