गाजियाबाद में यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा संपन्न, अभ्यर्थियों ने कहा- प्रश्न चुनौतीपूर्ण थे

गाजियाबाद में यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा संपन्न, अभ्यर्थियों ने कहा- प्रश्न चुनौतीपूर्ण थे

गाजियाबाद, 24 मई। रविवार को यहां संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के तहत सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 का आयोजन किया गया, जो कड़ी सुरक्षा और शांति के माहौल में संपन्न हुई। प्रशासन ने जिले में 45 परीक्षा केंद्र बनाए थे, जहां हजारों प्रतियोगियों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा का आयोजन दो सत्रों में हुआ, जिसमें पहला सत्र सुबह 9:30 से 11:30 तक और दूसरा सत्र 2:30 से 4:30 बजे तक चला। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही छात्राओं और छात्रों की भीड़ लगी थी। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रबंध किए थे। प्रत्येक केन्द्र पर सेक्टर मजिस्ट्रेट, जोनल मजिस्ट्रेट, एलआईयू अधिकारी और केंद्र व्यवस्थापक तैनात किए गए थे। इसके अतिरिक्त, निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था की गई थी, जिसके कारण परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।

परीक्षा समाप्त कर बाहर निकले प्रतियोगियों ने प्रश्नपत्र की कठिनाई को मध्यम से उच्च स्तर का बताया।

प्रतियोगी शिवम ने कहा कि परीक्षा का स्तर पिछले वर्षों की तरह चुनौतीपूर्ण था। उनके अनुसार, प्रश्नपत्र काफी विस्तृत था और कई सवालों को समझने और विश्लेषण करने की आवश्यकता थी।

उन्होंने यह भी बताया कि निर्णय क्षमता से जुड़े प्रश्न भी विभिन्न रूप से चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन अपनी तैयारी के कारण उनका समाधान करना संभव हुआ। शिवम ने आशा व्यक्त की कि उनका पेपर अच्छा गया है और उन्हें सकारात्मक नतीजे मिलेंगे।

दूसरी ओर, प्रतियोगी शाइस्ता मलिक ने साझा किया कि परीक्षा में 2023 के करेंट अफेयर्स से संबंधित कई प्रश्न पूछे गए। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन और विषय की गहराई से तैयारी करना सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। शाइस्ता का मानना है कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पढ़ाई का सही तरीका ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को ऐसे अध्ययन की विधि अपनानी चाहिए जिससे पढ़ा गया विषय लंबे समय तक याद रहे।

शाइस्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने कोचिंग ली, जहां नियमित अभ्यास और दीर्घकालिक अध्ययन पर जोर दिया जाता है।

प्रशासन के अनुसार, पहले सत्र में 62.31 प्रतिशत और दूसरे सत्र में 61.46 प्रतिशत उपस्थितियां दर्ज की गईं। कई प्रतियोगियों ने बताया कि इस बार प्रश्नों का स्वरूप काफी विश्लेषणात्मक और अवधारणात्मक था। कुछ छात्रों को इतिहास से जुड़े प्रश्न अधिक कठिन लगे, जबकि अच्छी तैयारी वाले छात्रों ने पेपर को संतुलित और उचित स्तर का बताया।