मुरादाबाद, 23 मई। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने विधायक हुमायूं कबीर के बकरीद पर गाय की कुर्बानी को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में नफरत को बढ़ावा देते हैं और यह देश के साम्प्रदायिक सौहार्द को क्षति पहुंचाते हैं। डॉ. हसन ने यह भी कहा कि जो लोग हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास करते हैं, वे देश के कल्याण के लिए हितकारी नहीं हो सकते और ऐसे लोग देशद्रोही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा हुमायूं कबीर की याचिका को खारिज करना एक सही निर्णय है। डॉ. हसन ने जोर देते हुए कहा कि करोड़ों हिंदू लोगों की गाय के प्रति गहरी श्रद्धा है और इसे सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम में कहीं पर यह नहीं कहा गया है कि केवल गाय की कुर्बानी ही दी जानी चाहिए, मुसलमान अन्य जानवरों की भी कुर्बानी कर सकते हैं।
डॉ. हसन ने कहा, "हम मानते हैं कि सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। जब हम एक-दूसरे की आस्था को समझेंगे और उसका आदर करेंगे, तभी देश में प्यार और साम्प्रदायिक सौहार्द बना रह सकेगा।"
उन्होंने यह भी बताया कि गाय का मुद्दा पुराना है। ऐसे में किसी भी समुदाय को उकसावे वाली राजनीति से दूर रहना चाहिए। डॉ. हसन ने कहा कि चाहे हिंदू हो या मुसलमान, जो लोग गाय का मांस खाते हैं, यह उनका व्यक्तिगत मामला हो सकता है, लेकिन देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं और विश्वासों का सम्मान भी आवश्यक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए ताकि इसकी गरिमा और सम्मान को और मजबूती प्रदान की जा सके।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद के अवसर पर गाइडलाइन जारी की है, जिसमें खुले सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी पशु के वध पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही बिना आवश्यक फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय, भैंस, बैल या बछड़े के वध की अनुमति नहीं होगी। इसी गाइडलाइन को चुनौती देते हुए हुमायूं कबीर ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी इस्लाम में अनिवार्य नहीं है। फिर भी, हुमायूं कबीर ने कहा है कि वे गाय की ही कुर्बानी देंगे।