मुंबई, 20 मई। हिंदी फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध निदेशक आदित्य चोपड़ा ने रोमांस को एक नए दृष्टिकोण से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया और इसी के साथ कई नए प्रतिभाशाली कलाकारों को भी पहचान दिलाई। वह हमेशा से ही मीडिया की नजरों से दूर रहने का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन उनकी फिल्मों ने करोड़ों लोगों के दिलों में खास स्थान बनाया है। कम ही लोग जानते हैं कि उनके बचपन में एपीडी नामक समस्या थी, जिससे उन्हें आवाजों को समझने में कठिनाई होती थी। फिर भी, आदित्य ने कभी हार नहीं मानी और मेहनत के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई। आदित्य चोपड़ा का जन्म 21 मई 1971 को मुंबई में हुआ था, और वह प्रसिद्ध निर्माता यश चोपड़ा और पामेला चोपड़ा के सबसे बड़े बेटे हैं। उनके छोटे भाई उदय चोपड़ा भी फिल्म उद्योग से जुड़े हुए हैं। आदित्य के घर में हमेशा फिल्मी माहौल रहा, जिसमें शूटिंग, कलाकारों की बैठकें और फिल्मों पर चर्चाएँ होती रहती थीं।
आदित्य चोपड़ा ने अपने बचपन और किशोरावस्था में एपीडी (ऑडिटरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर) से जूझा है। इस समस्या के कारण व्यक्ति आवाजें सुन सकता है, लेकिन उन्हें सही तरीके से समझने में कठिनाई होती है। कभी-कभी, विभिन्न ध्वनियों की पहचान करना मुश्किल होता है। यह स्थिति किसी भी बच्चे के आत्मबल को प्रभावित कर सकती है, लेकिन आदित्य ने इसे अपनी कमजोरी बनने नहीं दिया। उन्होंने खुद को फिल्मों और कहानियों की दुनिया में व्यस्त रखा और धीरे-धीरे अपनी विशेष पहचान बनाई।
आदित्य चोपड़ा ने सिर्फ 18 साल की उम्र में अपने पिता के साथ सहायक निर्देशक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने यश चोपड़ा की फिल्मों जैसे 'चांदनी', 'लम्हे' और 'डर' में काम किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखी और कहानियों को लेकर अपनी गंभीरता प्रदर्शित की।
आदित्य ने महज 23 वर्ष की आयु में 'दिलवाले दुल्हिनयां ले जाएंगे' का निर्देशन किया, जिसमें शाहरुख खान और काजोल मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी रोमांटिक फिल्म माना जाता है। इसने बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की और आज भी यह दर्शकों की पसंदीदा है। इस फिल्म के लिए आदित्य को फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार प्राप्त हुआ, और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया।
इसके बाद, आदित्य ने 'मोहब्बतें', 'रब ने बना दी जोड़ी' और 'बेफिक्रे' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। निर्माता के रूप में उन्होंने 'धूम', 'वीर-जारा', 'चक दे! इंडिया', 'एक था टाइगर', 'वॉर' और 'पठान' जैसी सफल फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने यश राज फिल्म्स को भारत की सबसे बड़ी फिल्म कंपनियों में से एक बना दिया।
आदित्य चोपड़ा ने कई नए कलाकारों को अपनी फिल्मों में अवसर प्रदान किया। अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह, परिणीति चोपड़ा, अर्जुन कपूर और भूमि पेडनेकर के करियर की शुरुआत में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यदि हम उनकी निजी जिंदगी पर नजर डालें, तो आदित्य चोपड़ा की पहली शादी पायल खन्ना से हुई थी, लेकिन बाद में उनका तलाक हो गया। बाद में, उन्होंने 2014 में अभिनेत्री रानी मुखर्जी से विवाह किया, और उनकी एक बेटी आदिरा है। आदित्य अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को हमेशा मीडिया से दूर रखने का प्रयास करते हैं।
आज, आदित्य चोपड़ा हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और प्रभावशाली फिल्म निर्माताओं में माने जाते हैं। उनके पिता यश चोपड़ा का निधन 2012 में हुआ था, लेकिन आदित्य ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए यशराज फिल्म्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।