PF Withdrawal Rules : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के करोड़ों सदस्यों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) खाते से पैसे निकालना अब पहले से कहीं ज्यादा सरल और पारदर्शी हो गया है। श्रम मंत्रालय की नई गाइडलाइन और केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा मंजूर नए नियमों के मुताबिक अब नौकरी-पेशा लोग अपनी जरूरत के वक्त इमरजेंसी और अन्य खास परिस्थितियों में अपने पीएफ फंड का बड़ा हिस्सा आसानी से निकाल सकते हैं। हालांकि, आज भी लोगों के मन में यह बड़ा सवाल बना रहता है कि क्या अपने पीएफ अकाउंट से पूरा 100% पैसा एक बार में निकाला जा सकता है या नहीं। पीएफ की आंशिक और पूरी निकासी से जुड़े इन सभी नए नियमों और श्रेणियों को जानना हर नौकरी करने वाले इंसान के लिए बेहद जरूरी है।

क्या पीएफ खाते से 100% पैसे निकाले जा सकते हैं?

नौकरी के दौरान: आप अभी भी नौकरी कर रहे और एडवांस के रूप में पैसे निकालना चाहते हैं तो आप अपने खाते में जमा कुल राशि का 100% एक बार में नहीं निकाल सकते। नए नियमों के अनुसार आप अपनी पात्रता के हिसाब से अधिकतम 75% तक की राशि ही एडवांस के तौर पर निकाल सकते हैं, जबकि 25% फंड को सेफ बफर के रूप में बचाकर रखना अनिवार्य होता है।

रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर: आप अपने पीएफ खाते का पूरा 100% बैलेंस (जिसमें कर्मचारी का शेयर, मालिक यानी नियोक्ता का शेयर और उस पर मिला ब्याज शामिल है) निकालना चाहते हैं तो इसके लिए आपका रिटायर होना जरूरी है। आप नौकरी छोड़ देते हैं और लगातार दो महीने यानी पूरे 60 दिन तक बेरोजगार रहते हैं तो आप पूरे 100% पीएफ फंड की अंतिम निकासी के लिए पूरी तरह योग्य बन जाते हैं।

आंशिक निकासी के लिए बनाई गई मुख्य 3 श्रेणियां और सीमाएं

आवश्यक आवश्यकताएं: इस कैटेगरी में खुद का या परिवार के किसी सदस्य का गंभीर इलाज शामिल है, जिसके लिए कोई भी ऊपरी सीमा तय नहीं की गई है यानी जरूरत के हिसाब से पैसे निकाले जा सकते हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए नौकरी के दौरान कुल 10 बार और खुद या परिवार में शादी के लिए कुल 5 बार एडवांस पैसे निकालने की छूट मिलती है।

आवास संबंधी जरूरतें: इसके तहत घर, जमीन या फ्लैट खरीदने, नया मकान बनवाने, होम लोन चुकाने और पुराने मकान की मरम्मत या रेनोवेशन कराने जैसे काम आते हैं। इन सभी कामों के लिए कोई भी कर्मचारी अपनी पूरी नौकरी के दौरान अधिकतम 5 बार तक पीएफ एडवांस ले सकता है।

विशेष परिस्थितियां: इसमें नौकरी छूटना या बोर्ड द्वारा तय की गई अन्य आपात स्थितियां शामिल हैं। इसके तहत एक फाइनेंशियल ईयर में 2 बार पैसे निकाले जा सकते हैं। नौकरी जाने पर तुरंत 75% तक की रकम निकाली जा सकती है और बाकी बचा 25% हिस्सा पूरे 2 महीने की बेरोजगारी के बाद निकाला जा सकता है।

कौन-सा फॉर्म कहां और कब इस्तेमाल करें?

फॉर्म 31 : आप नौकरी में रहते हुए बिना पैसे चुकाए जाने वाला नॉन-रिफंडेबल एडवांस या आंशिक निकासी करना चाहते हैं तो आपको यह फॉर्म भरना होगा।

फॉर्म 19 : जब आप नौकरी छोड़ देते हैं या रिटायरमेंट के बाद अपने पीएफ खाते का सारा पैसा एक साथ निकालना चाहते हैं, तब यह फॉर्म जमा किया जाता है।

फॉर्म 10C (पेंशन निकासी) : आपकी लगातार नौकरी की अवधि 10 साल से कम है तो आप यह फॉर्म भरकर अपनी पेंशन का पैसा एकमुश्त निकाल सकते हैं। मगर, आपकी नौकरी को 10 साल से ज्यादा हो चुके हैं तो आप पेंशन का पैसा एक साथ नहीं निकाल सकते। ऐसी स्थिति में आपको स्कीम सर्टिफिकेट लेना होगा और जब आपकी उम्र 58 साल पूरी हो जाएगी, तब आपको हर महीने नियमित पेंशन मिलने लगेगी।

क्लेम सेटलमेंट में कितना समय लगता है?

ऑनलाइन केवाईसी वाले क्लेम: जिन सदस्यों के ई-सेवा पोर्टल पर आधार, पैन और बैंक खाते जैसी सभी जानकारियां पूरी और वेरीफाइड हैं, उनके ऑनलाइन क्लेम 3 से 7 कार्य दिवसों के भीतर सेटल हो जाते हैं। वहीं, ऑटो-मोड के दायरे में आने वाले सही दावों का निपटान तो सिर्फ 72 घंटों के अंदर हो जाता है।

ऑफलाइन या भौतिक क्लेम: कोई कर्मचारी कागजात जमा करके ऑफलाइन आवेदन करता है तो उसमें 20 कार्य दिवस तक का समय लग सकता है। सामान्य तौर पर क्लेम पास होने के बाद 7 से 15 कार्य दिवसों के भीतर पैसा सीधे आपके खाते में पहुंच जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान फॉर्म जमा होने से लेकर पैसे ट्रांसफर होने तक हर स्टेप पर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए जानकारी मिलती रहती है।