नई दिल्ली, 20 मई। हर माता-पिता की कोशिश होती है कि उनके बच्चे स्वस्थ और सक्रिय रहें, लेकिन शरीर में आयरन की कमी बच्चों के विकास पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन का कहना है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया उनके मस्तिष्क के विकास और सीखने की क्षमता में रुकावट डाल सकता है। इसलिए, बच्चों को समय पर संतुलित और पौष्टिक आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को सही पोषण मिलने पर उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। जबकि आयरन की कमी के कारण बच्चे थकावट, कमजोरी और कम सक्रियता का शिकार हो सकते हैं। लंबे समय तक एनीमिया के रहने से बच्चों की याद्दाश्त, सीखने की क्षमता और मानसिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने बच्चों में एनीमिया से बचाव के लिए उन्हें आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का समावेश रोजाना के आहार में करने की सलाह दी है। इनमें हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दाल, चना, गुड़, अनार और खजूर जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा, विटामिन-सी युक्त फलों जैसे संतरा, आंवला और नींबू का सेवन आयरन के अवशोषण को बढ़ाने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों को छः महीने की उम्र के बाद समय पर पूरक आहार देना प्रारंभ करना चाहिए। मां के दूध के साथ पौष्टिक आहार बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान करता है। संतुलित आहार बच्चों की इम्युनिटी को भी बेहतर बनाता है जिससे वे अधिक स्वस्थ रहते हैं।
इसके अतिरिक्त, एनएचएम ने बताया है कि 6 से 59 माह तक के बच्चों को डॉक्टरी सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (आईएफए) सिरप की पूरक खुराक अवश्य दी जानी चाहिए। यह बच्चों में आयरन की कमी को सुधारने और एनीमिया से सुरक्षा में सहायक होता है।
बच्चों के खानपान पर नियमित ध्यान देना बेहद जरूरी है, क्योंकि उचित पोषण और नियमित देखभाल से बच्चों को एनीमिया जैसी समस्याओं से सुरक्षित रखा जा सकता है।