नई दिल्ली, 22 मई। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के कार्यालय में महिलाओं की सुरक्षा और पॉश कानून के अनुपालन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में इस मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई का आयोजन किया गया।
इस सुनवाई में टीसीएस के उच्च पदस्थ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। आयोग ने उनकी विशेष मांग के कारण ऑनलाइन भागीदारी की इजाजत दी थी। बैठक में एनसीडब्ल्यू की अतिरिक्त सचिव बी. राधिका चक्रवर्ती, आयोग द्वारा नियुक्त फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
सुनवाई के दौरान आयोग ने नासिक यूनिट में कार्यस्थल की सुरक्षा और पॉश एक्ट के कार्यान्वयन में कई गंभीर कमियों की ओर इशारा किया। आयोग ने बताया कि वहां स्थानीय मानव संसाधन ढांचे और शिकायत निवारण प्रणाली की कमी थी। इसके अतिरिक्त, नासिक कार्यालय के लिए अलग इंटरनल कमेटी का गठन नहीं किया गया था।
एनसीडब्ल्यू ने यह भी उजागर किया कि पॉश शिकायतें दर्ज करने के लिए उचित ढांचा उपलब्ध नहीं था। साथ ही, सीसीटीवी सिस्टम में भी तकनीकी समस्याएं थीं और संचालन के लिए जवाबदेही पर प्रश्न उठाए गए। आयोग ने यह भी चिंता जताई कि पुणे और नासिक के लिए एक ही संयुक्त इंटरनल कमेटी बनाई गई थी, जबकि पॉश कानून के अनुसार प्रत्येक इकाई के लिए अलग समिति होनी चाहिए।
आयोग ने टीसीएस से यह सवाल भी पूछा कि जांच के दौरान उठाए गए महत्वूपर्ण मुद्दों के बावजूद नासिक सेंटर पर किसी वरिष्ठ अधिकारी ने कर्मचारियों से सीधे संवाद क्यों नहीं किया।
हालांकि, आयोग ने टाटा समूह के देश के विकास में योगदान की सराहना की, साथ ही टाटा समूह से यह अपेक्षा की कि वह पॉश एक्ट का पालन गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ करे।
एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने टीसीएस को तत्काल सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि टीसीएस की सभी 127 यूनिट्स, जहां 10 या अधिक कर्मचारी मौजूद हैं, उन्हें चार सप्ताह के भीतर अलग-अलग इंटरनल कमेटियां बनानी होंगी। इसके साथ ही व्यापक पॉश प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और वार्षिक पॉश रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया।
आयोग ने अगले समीक्षा सत्र के लिए, जो चार सप्ताह बाद होगा, संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान आयोग ने दोहराया कि किसी भी संगठन को पॉश पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से पेश आना चाहिए। एनसीडब्ल्यू ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों की प्रक्रिया कानून के अनुसार जारी रहेगी, लेकिन आयोग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाना और पॉश कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है।