राजकोट, 22 मई। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अब सौराष्ट्र क्षेत्र के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र बन कर उभरा है। यहां एक ही स्थान पर 22 स्पेशियलिटी और 6 सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ गंभीर बीमारियों का मुफ्त उपचार उपलब्ध है। एम्स राजकोट की स्थापना दिसंबर 2020 में हुई थी, और फरवरी 2024 से यहां सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का संचालन शुरू किया गया है, जो मरीजों को अत्याधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।
राजकोट एम्स में एक मरीज मयूरी मोरजरिया ने साझा किया कि वह दांत के उपचार के लिए आई हैं और यहां केवल 10 रुपए की फीस लगती है। उन्होंने एम्स के स्टाफ की सहायक भूमिका की सराहना की, यह कहते हुए कि अन्य अस्पतालों में जाने पर बहुत अधिक खर्च होता। मरीज श्रद्धा ने बताया कि कम लागत में बेहतर उपचार यहां उपलब्ध है, और एम्स उनके लिए सर्वोत्तम अस्पताल है।
आंकड़ों के अनुसार, एम्स राजकोट में हर महीने लगभग 180 महत्वपूर्ण सर्जरी होती हैं। वर्ष 2024 में यहां 861 ऑपरेशन हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,927 हो गई। यहां के अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और जीवन समर्थन प्रणाली से लैस आईसीयू के कारण जटिल सर्जरी जैसे न्यूरोसर्जरी और यूरोलॉजी भी संभव हो गई हैं। इसी कारण से आस-पास के जिलों के मरीज अब अहमदाबाद या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करते हैं।
एम्स राजकोट के कार्यकारी निदेशक डॉ. एलएन दोराईराजन ने बताया कि इस अस्पताल से सौराष्ट्र के मरीजों को काफी लाभ हो रहा है। पहले द्वारका, पोरबंदर या जूनागढ़ के मरीजों को अहमदाबाद या वडोदरा जाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें राजकोट में ही सुपर स्पेशियलिटी उपचार मिल रहा है।
एम्स राजकोट में सी-डैक द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड सिस्टम के कारण मरीजों की पिछली रिपोर्ट और उपचार इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे उन्हें फाइलों के लिए भटकने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा, यहां सीटी स्कैन और 3 टेस्ला एमआरआई के साथ सभी डॉयग्नोस्टिक और लैबोरेटरी सेवाएं भी किफायती दरों पर उपलब्ध हैं।
कार्यकारी निदेशक ने कहा कि हमारे पास उन्नत डॉयग्नोस्टिक सुविधाएं मौजूद हैं। मरीजों को केवल 10 रुपये का कार्ड बनवाना होता है, जिसके बाद वे एक वर्ष तक किसी भी विभाग के डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं। दुर्घटनाओं या गंभीर चिकित्सा आपात स्थितियों में मरीजों को पहले 24 घंटों के लिए पूरी तरह से मुफ्त उपचार की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही, मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी एम्स राजकोट ने तेजी से प्रगति की है।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से एमबीबीएस सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 75 कर दी गई है। अब तक लगभग 8.5 लाख से अधिक मरीजों का विश्वास अर्जित कर चुका एम्स राजकोट आज मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी आशा का स्रोत बन चुका है।