आज के समय में लगभग हर घर में एसी, गीजर, फ्रिज, माइक्रोवेव और अन्य हाई-पावर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है। ऐसे में अगर घर की वायरिंग पुरानी हो या सही तरीके से फिटिंग न की गई हो, तो ओवरलोड के कारण आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वायरिंग में छोटी-छोटी तकनीकी गलतियां आगे चलकर बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
ज्यादा लोड से गर्म होने लगती है वायरिंग
जब एक ही लाइन पर जरूरत से ज्यादा इलेक्ट्रिकल उपकरण चलाए जाते हैं, तो तारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लगातार ज्यादा करंट गुजरने से वायर ओवरहीट होने लगती है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो वायर की इंसुलेशन पिघल सकती है और इससे शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
सस्ती और घटिया वायरिंग बन सकती है खतरा
कई लोग पैसे बचाने के लिए लोकल और कम गुणवत्ता वाली वायर या इलेक्ट्रिकल सामान खरीद लेते हैं। ऐसी वायर जल्दी गर्म होती हैं और उनमें स्पार्किंग की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। खराब वायरिंग अक्सर दीवारों के अंदर होती है, इसलिए शुरुआती खराबी आसानी से नजर नहीं आती। यही वजह है कि समय रहते समस्या का पता नहीं चल पाता और बड़ा हादसा हो सकता है।
ढीले कनेक्शन भी हैं बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि स्विच बोर्ड, प्लग या वायरिंग में ढीले कनेक्शन होने पर लगातार छोटी-छोटी स्पार्किंग होती रहती है। यह स्पार्किंग धीरे-धीरे बड़े शॉर्ट सर्किट में बदल सकती है और आग लगने का कारण बन सकती है। इसलिए समय-समय पर इलेक्ट्रिकल फिटिंग की जांच करवाना बेहद जरूरी है।
पुराने फ्यूज सिस्टम से बढ़ता है रिस्क
कई पुराने घरों में अब भी पुराने फ्यूज सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे फ्यूज कई बार ओवरलोड होने के बावजूद तुरंत बिजली सप्लाई बंद नहीं कर पाते। इस वजह से वायरिंग लगातार गर्म होती रहती है और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं आधुनिक MCB और अन्य सेफ्टी डिवाइस खतरा महसूस होते ही तुरंत बिजली काट देते हैं।
कैसे करें बचाव?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर में हमेशा अच्छी क्वालिटी की वायरिंग और सही अर्थिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा एडवांस सेफ्टी डिवाइस लगवाना और हर कुछ साल में वायरिंग की जांच करवाना जरूरी है। इससे किसी बड़े हादसे से समय रहते बचा जा सकता है।