एआई के लिए कानूनी जवाबदेही जरूरी, इंसानी निगरानी बनी रहनी चाहिए: ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में जस्टिस मनमोहन

एआई के लिए कानूनी जवाबदेही जरूरी, इंसानी निगरानी बनी रहनी चाहिए: ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में जस्टिस मनमोहन

नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन ने सोमवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल के लिए संस्थागत निगरानी और कानून के तहत जवाबदेही बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन इंसानी निर्णय प्रक्रिया हमेशा केंद्र में रहनी चाहिए। उन्होंने यह बात ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित डॉ. एच.आर. भारद्वाज मेमोरियल लेक्चर के दौरान कही। इस व्याख्यान का विषय था - "न्याय वितरण और कानूनी व्यवस्था पर एआई का प्रभाव"। जस्टिस मनमोहन ने कहा, "जरूरत इस बात की है कि एआई के इस्तेमाल के बावजूद मानवीय निर्णय को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। भारत को न्यायिक एआई के लिए एक स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जरूरत है और इसे भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। न्यायपालिका में क्षमता निर्माण की भी आवश्यकता होगी और विश्वविद्यालयों को एआई के नैतिक, संवैधानिक और प्रक्रियागत पहलुओं पर कोर्स विकसित करने होंगे।" जस्टिस मनमोहन ने डॉ. एच.आर. भारद्वाज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह बहुआयामी व्यक्तित्व थे। वह लेखक, वरिष्ठ अधिवक्ता, पांच बार सांसद और तीन प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में 15 वर्षों तक मंत्री रहे। वह उस पीढ़ी से थे जिसमें राजनीतिक मदभेदों के बावजूद लोग मित्र बन सकते थे। उन्होंने कहा कि डॉ. भारद्वाज हमेशा इस सवाल पर काम करते रहे कि "हर भारतीय तक न्याय कैसे पहुंचाया जाए।" जस्टिस मनमोहन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में लागू किए जा रहे ई-मोड प्रोग्राम का पहला चरण उसी समय शुरू हुआ था जब डॉ. भारद्वाज कानून मंत्री थे। जस्टिस मनमोहन ने कहा कि जब देश के कानून बनाए गए थे तब दुनिया पूरी तरह भौतिक थी, लेकिन अब दुनिया डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि यह समझा जाए कि पुराने कानूनों को उसी रूप में लागू करना सही है या नई परिस्थितियों के अनुसार नए सिद्धांतों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एआई बहुत तेज गति और बड़े स्तर पर बदलाव ला रहा है। अगर कोई कंप्यूटर प्रोग्राम पहले से तय नियमों के अनुसार काम करता है तो वह एआई नहीं कहलाता, लेकिन यदि कोई सिस्टम खुद डेटा के आधार पर नए नियम बनाना सीखता है, तो वह एआई सिस्टम है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने आगे कहा कि एआई के महत्व को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक एआई कमेटी का गठन किया है,