दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय, निजी स्कूल बिना सरकारी अनुमत्ति के फीस बढ़ा सकते हैं

दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय, निजी स्कूल बिना सरकारी अनुमत्ति के फीस बढ़ा सकते हैं

नई दिल्ली, 23 मई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में सरकारी सहायता के बिना चलने वाले प्राइवेट स्कूल नए शैक्षणिक सत्र में फीस को बढ़ा सकते हैं, इसके लिए उन्हें शिक्षा निदेशालय (डीओई) की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

न्यायालय ने अपने आदेश में बताया कि यदि स्कूल नए शैक्षणिक सत्र में फीस बढ़ाने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें केवल शिक्षा निदेशालय को इसकी जानकारी देनी होगी, अनुमति प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, अगर वे सत्र के दौरान फीस बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए शिक्षा निदेशालय से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

न्यायालय ने अभिभावकों को राहत देते हुए यह भी बताया कि स्कूल पूर्व वर्षों में बढ़ी हुई फीस की वसूली नहीं कर सकते। 2016-17 या उससे पहले के सत्रों की बढ़ी हुई फीस अब अभिभावकों से चुकाई नहीं जा सकेगी। स्कूलों की अंतिम प्रस्तावित फीस वृद्धि अब अप्रैल 2027 से प्रभावी होगी।

न्यायालय ने शिक्षा निदेशालय द्वारा शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के प्रस्तावों को अस्वीकार करने वाले सभी आदेशों को रद्द कर दिया है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने निदेशालय के पास पेंडिंग फीस वृद्धि प्रस्तावों को भी समाप्त कर दिया।

न्यायालय ने 'लैंड क्लॉज' के तहत आने वाले स्कूलों और उन स्कूलों के बीच अंतर को भी खारिज कर दिया जो इस क्लॉज के अंतर्गत नहीं आते। न्यायालय ने कहा कि लैंड क्लॉज, जो सामान्यतः अलॉटमेंट लेटर में एक शर्त होती है, को एक्ट और नियमों के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए और यह निदेशालय की कानूनी शक्तियों में वृद्धि नहीं कर सकता।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह निर्णय कई निजी स्कूलों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिन्होंने फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को शिक्षा निदेशालय द्वारा अस्वीकृत करने के फैसले को चुनौती दी थी। स्कूलों का कहना था कि शिक्षा निदेशालय बार-बार उनके फीस वृद्धि के अनुरोध को अस्वीकृत कर रहा है, जिससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।