दिल्ली सरकार की नई पहल: 72 घंटे पहले प्रदूषण की चेतावनी मिलेगी

दिल्ली सरकार की नई पहल: 72 घंटे पहले प्रदूषण की चेतावनी मिलेगी

नई दिल्ली, 22 मई। शुक्रवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में पर्यावरण विभाग और एआईआरएडब्ल्यूएटी रिसर्च फाउंडेशन, आईआईटी कानपुर के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण की समस्या से वैज्ञानिक तरीके से निपटना है। यह समझौता अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा और इसके जरिए राजधानी में एआई, उन्नत डेटा विश्लेषण, हाइपरलोकल मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक निर्णय सहायता प्रणाली को लागू किया जाएगा ताकि वायु गुणवत्ता प्रबंधन में सुधार हो सके।

इस महत्वपूर्ण मौके पर कैबिनेट मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा और अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस साझेदारी को वायु प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान, हॉटस्पॉट की निगरानी, बेहतर भविष्यवाणी प्रणाली और समय पर हस्तक्षेप में अहम बताया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में तकनीकी सुशासन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी की तर्ज पर दिल्ली सरकार भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इससे प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की बेहतर पहचान, रियल-टाइम निगरानी और पूर्वानुमान आधारित उपायों का प्रयास किया जाएगा।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली को वायु प्रदूषण जैसे दीर्घकालिक मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तकनीकों पर आधारित, पारदर्शी और परिणाम केंद्रित समाधानों की बेहद आवश्यकता है। यह समझौता राजधानी में स्मार्ट, वैज्ञानिक और जिम्मेदार पर्यावरण प्रबंधन के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए नवीनतम वैज्ञानिक और तकनीकी साधनों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस समझौते के तहत, दिल्ली में कम लागत वाले सेंसर, मोबाइल मॉनिटरिंग लैब और सैटेलाइट डेटा पर आधारित एकीकृत वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क का विकास होगा। यह प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी और स्थानीय स्रोतों का सटीक विश्लेषण करने में मदद करेगा। इस परियोजना के अंतर्गत एआई पर आधारित उन्नत निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) विकसित की जाएगी, जो प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान, हाइपरलोकल विश्लेषण, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण और 48 से 72 घंटे पहले वायु गुणवत्ता का अनुमान लगाने में सक्षम होगी।