नई दिल्ली, 23 मई। वैश्विक संकट के चलते भारत में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल की दरें 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई हैं। पिछले 10 दिनों में कुल मिलाकर, ईंधन की कीमतों में लगभग 5 रुपए प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिला है।
शनिवार को हुई इस वृद्धि के साथ दिल्ली में पेट्रोल का मूल्य 99.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल का 92.49 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
दिल्ली के अलावा, इस नई वृद्धि के बाद मुंबई में पेट्रोल 108.49 रुपए प्रति लीटर, कोलकाता में 110.64 रुपए प्रति लीटर और चेन्नई में 105.31 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, मुंबई में डीजल की कीमत 95.02 रुपए प्रति लीटर, चेन्नई में 96.98 रुपए प्रति लीटर और कोलकाता में 97.02 रुपए प्रति लीटर है।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते यह पिछले 10 दिनों में ईंधन की तीसरी बढ़ोतरी है। 15 मई को सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया में हो रहे संघर्ष के कारण ऊंची ऊर्जा कीमतों का भार धीरे-धीरे ग्राहकों पर डालना शुरू किया था।
15 मई को कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपए की वृद्धि की गई थी, इसके बाद 19 मई को 80 पैसे से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपए प्रति लीटर और डीजल की 91.58 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई थी।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन किया। भाजपा नेताओं ने भारत और अन्य देशों में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की तुलना की और दावा किया कि भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में वह देश है जहां आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा है।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और तेल आपूर्ति में बाधा आने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा। इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल पंपों पर साफ-साफ देखने को मिला। लेकिन भारत इस संदर्भ में एक प्रमुख और उल्लेखनीय अपवाद के रूप में उभरा है।