नई दिल्ली, 22 अप्रैल। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने पानी और सीवर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क (आईएफसी) में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है, जिससे नागरिकों को राहत मिलेगी।
हालिया नीति के अनुसार, अब आईएफसी की गणना पानी की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर की जाएगी। यह शुल्क केवल नई निर्माण परियोजनाओं या किसी संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण पर लागू होगा। जहां पानी की जरूरत नहीं बढ़ेगी, वहां आईएफसी नहीं लिया जाएगा। साथ ही, आईएफसी की गणना के दौरान नॉन-एफएआर और खुले क्षेत्रों को शामिल नहीं किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत, ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों के निवासियों को आईएफसी में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि जी और एच श्रेणी की कॉलोनियों में यह छूट 70 प्रतिशत तक जाएगी। इसके अलावा, आईएफसी केवल उन प्रॉपर्टीज़ पर लागू होगा जो 200 वर्ग मीटर से अधिक के प्लॉट पर स्थित हैं। प्लॉट का आकार सेल डीड, कन्वेंस डीड, रजिस्टर्ड जीपीए या एग्रीमेंट टू सेल जैसे दस्तावेजों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
दिल्ली जल बोर्ड ने छोटे आवासीय इकाइयों के लिए भी महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर स्थित 50 वर्ग मीटर तक की आवासीय इकाइयों को पानी और सीवर आईएफसी में अतिरिक्त 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। इसी तरह, आयकर अधिनियम की धारा 12एबी के तहत पंजीकृत संस्थानों और धार्मिक स्थलों को भी समान छूट प्रदान की जाएगी। जिन संस्थागत और व्यावसायिक भवनों में ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत है, उन्हें सीवर आईएफसी में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी, लेकिन यदि एसटीपी बंद पाया गया तो प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाएगा।
नई नीति से आम जनता पर वित्तीय दबाव कम होगा। उदाहरण के लिए, 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर बने 300 एफएआर और चार मंजिला मकान के लिए ए और बी श्रेणी की कॉलोनियों में पहले आईएफसी लगभग 13.18 लाख रुपये था, जो अब घटकर लगभग 5.40 लाख रुपये रह जाएगा। ई और एफ श्रेणी में यह शुल्क करीब 2.70 लाख रुपये और जी व एच श्रेणी में लगभग 1.62 लाख रुपये होगा।
इसके अलावा, दिल्ली जल बोर्ड ने नजफगढ़ क्षेत्र में 12 नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का ठेका भी दिया है। इनकी कुल क्षमता 46.5 एमजीडी होगी और इस प्रोजेक्ट पर लगभग 860 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, केशोपुर एसटीपी की क्षमता को 12 एमजीडी से बढ़ाकर 18 एमजीडी किया जाएगा। त्रिलोकपुरी में पुराने ट्रंक सीवर का जीर्णोद्धार और शाहदरा के रोहतास नगर में नए अंडरग्राउंड रिजर्वायर व बूस्टर पंपिंग स्टेशन के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है।